Babulal Marandi raises questions about the CID probe into the JSSC recruitment scam, alleges an attempt to shield the 'big fish'.

मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति में देरी पर बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

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Babulal latter

रांची। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति अब तक लंबित रहने और राज्य सूचना आयोग का कामकाज पूरी तरह शुरू नहीं होने को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुख्य सूचना आयुक्त के चयन के लिए संबंधित समिति की बैठक तत्काल बुलाने और नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की मांग की है।

बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में वह और मंत्री हफीजुल हसन भी मौजूद थे। बैठक के दौरान उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सवाल किया था। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था कि नियुक्ति जल्द कर दी जाएगी।

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‘आश्वासन पर विश्वास करके दी थी सहमति’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद भी मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके कारण आयोग में अपीलों और शिकायतों की सुनवाई का कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नागरिक अपनी अपीलों और शिकायतों पर सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं, तो नियुक्तियों का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।

मरांडी ने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन पर विश्वास करके ही उन्होंने नियुक्ति संबंधी अनुशंसा पर अपनी सहमति दी और हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने लिखा कि यदि उन्हें पहले पता होता कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति लंबित रखी जाएगी और आयोग का कामकाज शुरू नहीं होगा, तो वह उस समय हस्ताक्षर नहीं करते।

उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि जनप्रतिनिधि भी मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा नहीं कर सकते तो जनता को क्या जवाब दिया जाए।

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हाईकोर्ट में जनहित याचिका का भी दिया हवाला

बाबूलाल मरांडी ने पत्र में इस मामले से जुड़ी उच्च न्यायालय में चली जनहित याचिका का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने के आश्वासन के आधार पर जनहित याचिका का निष्पादन हुआ था। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी थी कि राज्य सूचना आयोग को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाता।

उन्होंने कहा कि यदि अब किसी नागरिक को फिर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़े और लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़े, तो इस अतिरिक्त देरी की जिम्मेदारी किसकी होगी। मरांडी ने सवाल किया कि जो काम सरकार खुद समय पर कर सकती है, उसके लिए जनता को बार-बार अदालत क्यों जाना पड़े।

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‘सुनवाई नहीं होने से RTI का अधिकार प्रभावित’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी कामकाज के संबंध में सवाल पूछने और जवाब प्राप्त करने का अधिकार देता है। राज्य सूचना आयोग में सुनवाई नहीं होने से यह अधिकार व्यवहार में प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि समय पर सूचना नहीं मिलने से कई मामलों में सूचना प्राप्त करने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। इसलिए इस स्थिति को अनिश्चितकाल तक जारी रखना उचित नहीं है।

तत्काल बैठक और समयसीमा बताने की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मुख्य सूचना आयुक्त के चयन के लिए संबंधित समिति की बैठक अविलंब बुलाने, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराने और राज्य सूचना आयोग में अपीलों एवं शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने की मांग की है।

साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से इन सभी कार्यों के लिए स्पष्ट समयसीमा से उन्हें अवगत कराने को कहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के अनुरूप इस बार समयबद्ध कार्रवाई होगी और लोगों को अपने अधिकार के लिए और इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।