अघोरेश्वर भगवान राम की 90वीं जयंती पर गूंजा मानवता और आत्म-सुधार का संदेश

वाराणसी: अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव में परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की 90वीं जयंती भक्तिमय वातावरण में मनाई गई। दो दिवसीय जयंती समारोह की शुरुआत 17 सितंबर को परमपूज्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी के 426वें जन्म षष्ठी (लोलार्क षष्ठी) पर्व के साथ हुई। देशभर से पहुंचे श्री सर्वेश्वरी समूह के सैकड़ों सदस्यों और श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
जयंती के अवसर पर आयोजित विचार-गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने कहा कि समाज में बढ़ती कटुता, विभाजन, स्वार्थ और अशांति का मूल कारण केवल बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि मनुष्य की अपनी कमजोरियां, इंद्रियों की पराधीनता और विवेक का क्षीण होना है। महापुरुषों की वाणी और जीवन-दृष्टि के रूप में समाज के सामने पर्याप्त मार्गदर्शन उपलब्ध है, लेकिन आवश्यकता उनके विचारों को अपने आचरण में उतारने की है।

उन्होंने कहा कि सूर्य, चंद्रमा, वायु और पंचतत्व किसी जाति, धर्म, भाषा या देश के आधार पर भेदभाव नहीं करते। सभी मनुष्यों का शरीर उन्हीं पंचतत्वों से बना है और सबके भीतर एक ही परम तत्व विद्यमान है। ऐसे में जाति, धर्म, मजहब, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजन तथा घृणा मानवता की मूल भावना के विपरीत है।
पूज्य बाबा ने कहा कि समाज और राष्ट्र में बढ़ते संघर्ष, स्वार्थ, लोभ, अहंकार और भ्रष्ट आचरण से बचने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले अपने भीतर सुधार लाना होगा। ‘पराधीन सपनेहूँ सुख नाहीं’ का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि इंद्रियों का दास बन जाना भी एक प्रकार की पराधीनता है। जब मनुष्य इंद्रियों के वश में हो जाता है, तब लोभ, क्रोध, अहंकार जैसी विकृतियां उसके जीवन में दुख और अशांति का कारण बनती हैं।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों की शिक्षाओं को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है। उनका अध्ययन, चिंतन और जीवन में पालन जरूरी है। श्री सर्वेश्वरी समूह से जुड़े लोगों का आह्वान करते हुए उन्होंने स्वार्थपूर्ण विवादों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर राष्ट्र, समाज, संस्कृति और मानवता के हित में कार्य करने की अपील की।

गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व अपर निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.पी. सिंह ने की। वक्ताओं में डॉ. प्रदीप सिंह, पूर्व निदेशक, केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, धनबाद, वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत मिश्र, श्री धनंजय राव, श्री मनोज सिंह और श्री शशि गुप्ता शामिल रहे। मंगलाचरण कु. राशि ने किया, जबकि श्रीमती प्रीतिमा सिंह ने भजन प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. वामदेव पाण्डेय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन श्री सर्वेश्वरी समूह के उपाध्यक्ष श्री सुरेश सिंह ने किया।

कार्यक्रम के दौरान पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु द्वारा रचित पुस्तक ‘अघोरेश्वर कथा’ के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण भी किया। जयंती के अवसर पर सुबह सफाई-श्रमदान के बाद करीब 5:50 बजे श्रद्धालुओं ने प्रभातफेरी निकाली। यह पड़ाव आश्रम से अघोरेश्वर महाविभूति स्थल और अघोरेश्वर भगवान राम घाट होते हुए गंगातट तक पहुंची। वहां अघोरेश्वर महाप्रभु की समाधि के दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु गंगाजल से भरे कलश लेकर आश्रम लौटे।

सुबह 8 बजे पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव राम जी ने आश्रम के गणेश पीठ स्थित परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के चिरकालिक आसन का विधिवत पूजन किया। इसके बाद श्री पृथ्वीपाल जी ने सफलयोनि का पाठ किया। पूज्य बाबा ने आश्रम के उपासना स्थल चिरकुट देवी विहार में हवन-पूजन किया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ।

दोपहर 3:30 बजे देवी विहार में पिछले दिन से चल रहे अखंड संकीर्तन ‘अघोरान्ना परो मन्त्रः नास्ति तत्वं गुरोः परम्’ का समापन पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी की आरती-पूजन के साथ हुआ। शाम को पारिवारिक विचार-गोष्ठी में विशिष्टजनों का उद्बोधन और पूज्यपाद बाबा जी का आशीर्वचन हुआ।

जयंती के अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, पड़ाव की ओर से श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय के विभिन्न वार्डों में भर्ती करीब 250 मरीजों के बीच भुना चना, फल, बिस्कुट और फलों का जूस वितरित किया गया। इस सेवा कार्य में चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री ब्रिजेश कुमार और डेंटिस्ट डॉ. पुष्प सिंह का सहयोग मिला।

आश्रम की ओर से सेवा कार्यक्रम में श्री सर्वेश्वरी समूह के संयुक्त मंत्री श्री अरविंद कुमार सिंह, प्रचार मंत्री श्री पारस नाथ यादव, कोषाध्यक्ष श्री चंद्रविक्रम शाह, अघोर परिषद ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री नागेश सिंह, श्री धर्मेंद्र गौतम सहित अन्य स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। समारोह के समापन पर पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने सभी से बुद्धि, विवेक, आत्म-सुधार और मानवता के अनुरूप जीवन जीने तथा महापुरुषों की शिक्षाओं को आचरण में उतारकर समाज के कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया।

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