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RIMS में एजेंसियों के 44 करोड़ रुपये के बिल बकाया, सप्लाई घटी; इलाज पर पड़ रहा असर

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रांची। राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में एजेंसियों के करीब 44 करोड़ रुपये के बिल भुगतान के लिए लंबित हैं। भुगतान में देरी का असर अब अस्पताल में जरूरी मेडिकल उपकरण, दवा, इम्प्लांट और अन्य चिकित्सा सामग्री की सप्लाई पर पड़ने लगा है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कुछ एजेंसियों ने नई सप्लाई कम कर दी है, जिससे मरीजों के इलाज में परेशानी की आशंका बढ़ गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रिम्स के आधिकारिक पत्राचार और उपलब्ध दस्तावेजों में विभिन्न उपकरणों और सेवाओं से संबंधित करीब 44 करोड़ रुपये के भुगतान लंबित होने की बात सामने आई है। इनमें मरीजों की जांच और इलाज से सीधे जुड़े उपकरण भी शामिल हैं।

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रेडियोलॉजी से सर्जरी और ट्रॉमा सेंटर तक भुगतान अटका
लंबित बिलों में कई महंगे मेडिकल उपकरण शामिल हैं। इनमें—

रेडियोलॉजी विभाग में MRI मशीन का करीब 23.50 करोड़ रुपये का बिल।
डिजिटल मैमोग्राफी का 3.74 करोड़ रुपये से अधिक का बिल।
पैथोलॉजी विभाग में ऑटोमेटेड स्लाइड स्टेनर का करीब 3.62 करोड़ रुपये।
सर्जरी विभाग में एंडोस्कोपिक उपकरणों से जुड़े करीब 2.16 करोड़ रुपये के बिल।
फ्लेक्सिबल इंटुबेशन वीडियो एंडोस्कोप का करीब 37.27 लाख रुपये।
मेडिटेक OT टेबल के 53.16 लाख और 9.66 लाख रुपये के बिल भुगतान प्रक्रिया में हैं।
ट्रॉमा सेंटर में एंब्रोस्कोपिक ब्रोंकोस्कोप का करीब 9.95 लाख रुपये और मल्टीपैरा मॉनिटर का 9.44 लाख रुपये का बिल लंबित है।
न्यूरोसर्जरी में डिफिब्रिलेटर का 8.64 लाख रुपये और सी-आर्म मशीन का करीब 97.86 लाख रुपये का भुगतान भी लंबित बताया गया है।
डेंटल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी से जुड़े इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक OT टेबल और सीलिंग OT लाइट के करीब 17.84 लाख रुपये तथा PGI स्किल लैब के करीब 4.64 करोड़ रुपये के भुगतान भी लंबित सूची में हैं।

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दो साल में 95 करोड़ रुपये सरेंडर

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों में समय पर राशि खर्च नहीं होने के कारण रिम्स को करीब 95 करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े। वहीं, वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से रिम्स को करीब 200 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब बजट उपलब्ध है और एजेंसियां उपकरण, दवा, इम्प्लांट तथा अन्य जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर चुकी हैं, तो उनके भुगतान में इतनी देरी क्यों हो रही है।

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भुगतान में देरी से नई सप्लाई पर भी असर

लंबे समय तक भुगतान अटकने से नई खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सप्लायर एजेंसियों से जुड़े लोगों के अनुसार, भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में उनकी कार्यशील पूंजी फंस जाती है। इसका असर नई आपूर्ति पर पड़ सकता है और एजेंसियां रिम्स में नए टेंडर लेने से भी पीछे हट सकती हैं।

बिल सत्यापन और फाइल प्रक्रिया में देरी पर सवाल

भुगतान में देरी का कारण केवल बजट की कमी नहीं माना जा सकता। बिल के सत्यापन, स्वीकृति और फाइल के निपटारे की प्रक्रिया में कहां देरी हो रही है, इसकी समीक्षा जरूरी है। क्योंकि कई मामलों में उपकरण और चिकित्सा सामग्री अस्पताल को उपलब्ध कराई जा चुकी है, जबकि संबंधित एजेंसियों का भुगतान अभी तक लंबित है।

जाहिर है रिम्स में बड़ी संख्या में मरीज गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर मरीजों की जांच और उपचार पर पड़ सकता है।

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Drishti Now Desk

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