झारखंड में नशे वाली दवाओं की खरीद-बिक्री पर AI की नजर, गड़बड़ी होते ही मिलेगा अलर्ट

रांची: झारखंड में नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। अब ऐसी दवाओं की खरीद-बिक्री पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए नजर रखी जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), झारखंड और राज्य के औषधि नियंत्रण विभाग ने मिलकर विशेष पोर्टल तैयार किया है। पोर्टल का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही इसका शुभारंभ किया जाएगा।
इस संबंध में मंगलवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने पोर्टल की कार्यप्रणाली और इसकी विशेषताओं की जानकारी दी।

इस पोर्टल के जरिए दवा निर्माता से लेकर थोक विक्रेता, खुदरा दुकानदार और मरीज तक दवाओं की आपूर्ति और बिक्री पर नजर रखी जा सकेगी। किस दवा की कितनी मात्रा किस निर्माता या विक्रेता से किस दुकान को बेची गई और किस दुकान ने कितनी दवा खरीदी, इसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। यदि किसी दवा की असामान्य रूप से अधिक खरीदारी या बिक्री होती है, तो पोर्टल तत्काल अलर्ट जारी करेगा। इसके आधार पर विभाग संदिग्ध कारोबार की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा।
पोर्टल में आम नागरिकों के लिए भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई है। किसी क्षेत्र में दवाओं का अवैध कारोबार या नशे के लिए दवाओं का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिलने पर लोग पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर सकेंगे। इसके बाद औषधि नियंत्रण विभाग मामले की जांच कर कार्रवाई कर सकेगा।

इस पोर्टल के जरिए दवाओं की गुणवत्ता और उनके संबंध में किए जाने वाले भ्रामक दावों की भी निगरानी होगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था किसी दवा के सेवन से गंभीर बीमारी ठीक होने का दावा करती है, तो उसकी जांच की जा सकेगी। गलत दावे पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। विभाग के अनुसार, दवाओं के दुरुपयोग की निगरानी के विशेष उद्देश्य से देश में पहली बार इस तरह का पोर्टल तैयार किया गया है। इसकी एक खासियत यह भी है कि दूसरे राज्यों के औषधि नियंत्रण विभाग और संबंधित एजेंसियां भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही दवाओं की संदिग्ध खरीद-बिक्री की समय रहते पहचान कर कार्रवाई करना आसान होगा। बैठक में औषधि निदेशक ऋतु सहाय, सहायक निदेशक प्रणब प्रभात और राम कुमार झा सहित औषधि नियंत्रण विभाग एवं एनआईसी के अधिकारी मौजूद थे।

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