BMS ऐप से ई-रिक्शा चालकों की बढ़ी परेशानी, साइबर ठगी और तकनीकी खामियों ने बढ़ाई चिंता

देश के कई हिस्सों में ई-रिक्शा चालकों के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जुड़ी तकनीकी खामियां और साइबर सुरक्षा का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। हाल के दिनों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कुछ लोगों ने कथित तौर पर BMS मोबाइल ऐप का दुरुपयोग कर चलते ई-रिक्शों को बीच रास्ते में बंद कर दिया। इससे चालकों की रोजी-रोटी पर असर पड़ने के साथ यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ ई-रिक्शों में इस्तेमाल होने वाले ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कोई भी व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसे लॉक या डिस्चार्ज बंद कर सकता था। इसका फायदा उठाकर कुछ शरारती तत्वों ने ई-रिक्शों को बीच सड़क पर रोकने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने एक ऐसे मामले की जांच शुरू की है, जिसमें आरोप है कि एक युवक पहले BMS के जरिए ई-रिक्शा बंद कर देता था और फिर खुद को मैकेनिक बताकर उसे दोबारा चालू करने के बदले पैसे वसूलता था। इसी तरह की शिकायतें भोपाल से भी सामने आई हैं। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या स्वयं BMS तकनीक नहीं, बल्कि कमजोर सुरक्षा व्यवस्था और उसके दुरुपयोग की है। बैटरी निर्माता अब ऐसे सिस्टम में पासवर्ड सुरक्षा और अन्य सुरक्षा फीचर जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। बताया गया है कि संबंधित ऐप को भी अपडेट कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।
इस बीच साइबर विशेषज्ञों ने ई-रिक्शा चालकों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को मोबाइल या बैटरी से कनेक्ट न करने दें, केवल अधिकृत सर्विस सेंटर से ही तकनीकी सहायता लें और यदि वाहन संदिग्ध तरीके से बंद हो जाए तो तुरंत पुलिस या कंपनी के अधिकृत सेवा केंद्र से संपर्क करें।
तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि डिजिटल सुविधाओं के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है, ताकि तकनीक लोगों की सुविधा बने, परेशानी का कारण नहीं।

















