JPSC controversy and questions on social media

JPSC विवाद और सोशल मीडिया के सवाल: X अकाउंट की पोस्ट से अभ्यर्थियों की सफलता पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार

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JPSC controversy and questions on social media

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं के परिणाम और चयन प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इन दिनों X (पूर्व में ट्विटर) पर एक अकाउंट की पोस्ट चर्चा में है, कोचिंग संस्थान का काला चिट्ठा’ नामक हैंडल से पोस्ट शेयर करते हुए JPSC में चयनित कुछ अभियर्थियो पर सवाल उठाए गए हैं. जिसमें  उनकी सफलता और कथित तौर पर कोचिंग संस्थानों से जुड़े नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

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गुदरी के लाल’ से जवाब की मांग

वायरल पोस्ट में एक चयनित अभ्यर्थी को संबोधित करते हुए सवाल किया गया है कि उनकी सफलता को लेकर सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे कथित ‘सेटिंग’ के आरोपों पर वे सामने आकर अपना पक्ष क्यों नहीं रखते।

पोस्ट में दावा किया गया है कि संबंधित अभ्यर्थी ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और अपनी पृष्ठभूमि को लेकर खुद को डिलीवरी बॉय बताया था। इसी संदर्भ में पोस्ट करने वाले ने सवाल उठाया है कि यदि कोई व्यक्ति डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता था तो DSP बनने के लिए कथित तौर पर लाखों रुपये देने की बात कैसे सामने आ सकती है।

पोस्ट में यह भी पूछा गया है कि अभय तिवारी ने संबंधित अभ्यर्थी का नाम कथित तौर पर क्यों लिया था?
पोस्ट में चयनित अभ्यर्थी से सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपनी सफलता के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

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मनीष के चयन को लेकर भी सवाल

इसी X अकाउंट की एक अन्य पोस्ट में मनीष नाम के एक चयनित अभ्यर्थी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि JPSC चयन को लेकर अभय तिवारी की ओर से लगाए गए कथित ‘सेटिंग से चयन’ के आरोप पर मनीष को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

पोस्ट में पूछा गया है कि क्या उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। साथ ही कहा गया है कि जिन-जिन चयनित अभ्यर्थियों के नाम सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे हैं, उन्हें सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट करने पर भी टिप्पणी

X पोस्ट में कुछ चयनित अभ्यर्थियों के सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट किए जाने और पुरानी तस्वीरों या रील्स के हटाए जाने को लेकर भी टिप्पणी की गई है। पोस्ट करने वाले ने दावा किया है कि सोशल मीडिया से सामग्री हटाने या अकाउंट प्राइवेट करने से उठ रहे सवाल खत्म नहीं होंगे।

आरोपों की पुष्टि जरूरी

जाहिर है JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में चयन से जुड़े किसी भी तरह के अनियमितता के आरोप बेहद गंभीर होते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप अपने आप में प्रमाण नहीं माने जा सकते। लेकिन छात्रों के आंदोलन को देखते हुए सवाल तो उठ खड़ा होता है क्या परीक्षा सचमुच फेयर था या गड़बड़ियां हुई थी ।

फिलहाल वायरल हो रही पोस्ट में जिन अभ्यर्थियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनका पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल दावों और आरोपों पर आधारित है।

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