Arbitrary practices in coaching centers will no longer be tolerated.

कोचिंग में मनमानी अब नहीं चलेगी! झारखंड समेत राज्यों में सख्ती, केंद्र ने राज्यसभा में बताया पूरा प्लान

रांची । अगर आप अपने बच्चे का दाखिला किसी निजी कोचिंग संस्थान में कराने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। महंगी फीस, बड़े-बड़े सफलता के दावे, रिफंड को लेकर परेशानी और छात्रों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अब कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी तेज हो गई है।

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में साफ किया है कि निजी कोचिंग संस्थानों को नियमों के दायरे में लाने की जिम्मेदारी केवल केंद्र की नहीं, बल्कि राज्यों की भी है। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने 12 अगस्त 2026 को लिखित जवाब में बताया कि केंद्र की गाइडलाइन के बाद कई राज्यों ने अपने कानून और नियम लागू कर दिए हैं। इनमें झारखंड भी शामिल है।

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झारखंड में 2025 से कानून, अब नजर छात्रों के अधिकारों पर

केंद्र की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक झारखंड ने Coaching Centre (Control and Regulation) Act, 2025 लागू किया है। यानी राज्य में निजी कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर अब कानूनी ढांचा मौजूद है।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि कोचिंग संस्थानों का कारोबार सीधे छात्रों और अभिभावकों की जेब से जुड़ा है। एक ओर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी कोचिंग पर निर्भर हैं, वहीं दूसरी ओर फीस, सुविधाओं और सफलता के दावों को लेकर पारदर्शिता की मांग लगातार उठती रही है।

फीस भरने से पहले छात्र देख सकेंगे जरूरी जानकारी

केंद्रीय गाइडलाइन में कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इनमें शिक्षकों की योग्यता, कोर्स और उसकी अवधि, पाठ्यक्रम, फीस, फीस रिफंड पॉलिसी और आसान एग्जिट पॉलिसी जैसी जानकारियां शामिल हैं।

संस्थान को यह भी बताना होगा कि वहां कितने विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और कितने छात्रों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश हासिल किया है। इसका सीधा मतलब है कि अभिभावकों और छात्रों को कोचिंग चुनने से पहले ज्यादा जानकारी मिल सकेगी।

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सिर्फ रिजल्ट दिखाकर छात्रों को आकर्षित करना भी आसान नहीं

कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों पर भी केंद्र ने सख्ती की है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने 13 नवंबर 2024 को कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इसके तहत किसी सफल छात्र के नाम, फोटो, वीडियो या testimonial का इस्तेमाल उसकी लिखित सहमति के बिना विज्ञापन में नहीं किया जा सकता। झूठे या भ्रामक दावों और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है।

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मानसिक दबाव और छात्रों की सुरक्षा भी एजेंडे में

सरकार ने कोचिंग संस्थानों में सिर्फ फीस और विज्ञापन को ही मुद्दा नहीं माना है। केंद्रीय गाइडलाइन में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं, रिकॉर्ड रखने और शिकायतों के समाधान पर भी जोर दिया गया है।

कोचिंग संस्थानों के लिए आचार संहिता और शिकायत निवारण व्यवस्था का प्रावधान भी गाइडलाइन का हिस्सा है।

2026 में भी कई राज्यों ने बनाए नए नियम

दिलचस्प बात यह है कि केंद्र के जवाब के मुताबिक कई राज्यों ने 2026 में भी कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी, तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार शामिल हैं। वहीं राजस्थान, झारखंड और असम ने 2025 में कानून बनाए हैं।

अब सवाल सिर्फ कानून का नहीं, जमीन पर अमल का है

केंद्र की गाइडलाइन और राज्यों के कानून बनने के बाद असली सवाल इनके जमीनी स्तर पर पालन का है। खासकर झारखंड में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, फीस, विज्ञापन, छात्रों की सुरक्षा और शिकायतों से जुड़े नियमों को किस तरह लागू कराया जाता है। हालांकि रांची नगर निगम ने कई संस्थानों को नोटिस किया है।

यानी आने वाले समय में कोचिंग चुनने वाले छात्रों और अभिभावकों के लिए सिर्फ “कितने बच्चे सेलेक्ट हुए” देखना काफी नहीं होगा। फीस कितनी है, रिफंड की शर्त क्या है, शिक्षक कितने योग्य हैं और संस्थान नियमों का पालन कर रहा है या नहीं—ये सवाल भी उतने ही जरूरी होंगे।

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Drishti Now

Drishti Now

वरिष्ठ संवाददाता

झारखंड की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय खबरों पर लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।