Children's future is being enriched through traditional agricultural knowledge; children in rural areas are learning farming techniques alongside their studies.

पारंपरिक कृषि ज्ञान से संवर रहा बच्चों का भविष्य, पढ़ाई के साथ खेती की तकनीक सीख रहे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे

Children's future is being enriched through traditional agricultural knowledge; children in rural areas are learning farming techniques alongside their studies.
Children’s future is being enriched through traditional agricultural knowledge; children in rural areas are learning farming techniques alongside their studies.

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा: आधुनिक शिक्षा के दौर में जहां पढ़ाई का दायरा तेजी से किताबों और कक्षाओं तक सीमित होता जा रहा है, वहीं सिमडेगा के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पारंपरिक कृषि और जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ने की पहल देखने को मिल रही है। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ स्थानीय कृषि तकनीकों और पारंपरिक ज्ञान की जानकारी भी मिल रही है।

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ऐसा ही दृश्य राजकीय मध्य विद्यालय फागूटोली में देखने को मिला, जहां विद्यालय की रसोइया बच्चों को मड़वा (रागी) की खेती की जानकारी देती नजर आईं। उन्होंने बच्चों को मड़वा के पौधों की रोपाई की तकनीक समझाते हुए बताया कि उचित दूरी और सही तरीके से रोपाई करने से फसल का बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

पारंपरिक कृषि का यह व्यावहारिक ज्ञान बच्चों को खेती से जोड़ने के साथ-साथ उनमें श्रम के प्रति सम्मान, प्रकृति के प्रति लगाव और स्थानीय संसाधनों के महत्व की समझ विकसित करने में भी मददगार हो सकता है। ऐसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चे यह भी समझ पाते हैं कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन और रोजगार से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान का भी इसमें महत्वपूर्ण स्थान है। सिमडेगा जैसे कृषि प्रधान जिले में इस तरह की पहल खास मायने रखती है। यदि बच्चों को पढ़ाई प्रभावित किए बिना कृषि, पर्यावरण, हस्तकला और अन्य स्थानीय कौशल से परिचित कराया जाए तो भविष्य में वे स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ सकते हैं।

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हालांकि बच्चों से पढ़ाई के अलावा कृषि अथवा अन्य कार्य कराए जाने को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में बच्चों से श्रम कराने और उन्हें श्रम, कृषि एवं पारंपरिक कौशल का व्यावहारिक ज्ञान देने के बीच अंतर को समझना जरूरी है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित किए बिना यदि उन्हें स्थानीय जीवन और रोजगार से जुड़े कौशल सिखाए जाएं तो यह उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

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बदलते समय में शिक्षा की अवधारणा को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने की जरूरत है। पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर ग्रामीण बच्चों को आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार किया जा सकता है। फागूटोली विद्यालय का यह दृश्य इसी दिशा में एक उम्मीद जगाता है।

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