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CBI कोर्ट ने FCI के तत्कालीन GM को किया बरी, सीबीआई सबूत पेश नहीं कर पायी

झारखण्ड में जाँच के बाद सबूत नहीं मिलने के बाद बरी होने से सीबीआई की किरकिरी हुई है दरअसल   CBI की स्पेशल कोर्ट ने टेंडर  में भ्रष्टाचार करने के आरोपी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया  के तत्कालीन रांची महाप्रबंधक जी कार्तिकेयन और ठेकेदार जुगल किशोर को साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया है. RC-4 A-15 से जुड़े मामले में सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद CBI कोर्ट ने 30 मई को अपना फैसला सुनाया है. सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा की अदालत ने सभी गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों को बरी करने का आदेश दिया है.

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आरोपों को सिद्ध करने के लिए CBI के द्वारा कई साक्ष्य और 11 गवाह अदालत के समक्ष पेश किये गए. जबकि बचाव पक्ष ने सिर्फ 4 गवाह पेश किये. CBI के 11 गवाह ये साबित नहीं कर पाये की जी कार्तिकेयन ने टेंडर देने में भ्रष्टाचार किया है. जिसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया. बचाव पक्ष की ओर से रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता शंभू अग्रवाल और रोहित रंजन प्रसाद ने अदालत में पक्ष रखा.

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बता दें कि तत्कालीन महाप्रबंधक जी कार्तिकेयन पर आरोप लगा था कि जीएम रहते उन्होंने गढ़वा के किशोर इंटरप्राइजेज को ऊंची कीमत पर ठेका दिया था. जबकि कम कीमत पर टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों को इन्होंने नजरअंदाज कर दिया था. जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हुई थी. जिसके बाद सीबीआई ने मई 2015 में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी.

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