JPSC परीक्षा अनियमितता मामला: CID ने तीन और आरोपियों को किया गिरफ्तार, अब तक 14 आरोपी दबोचे

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार के रूप में हुई है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही इस पूरे मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
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सीआईडी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए कथित तौर पर “सेटिंग-गेटिंग” का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। जांच एजेंसी इन आरोपियों से पूछताछ कर OMR शीट में हेरफेर, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और आर्थिक लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

OMR शीट टेंपरिंग और करोड़ों की वसूली की जांच
पूछताछ के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने आरोपियों से OMR शीट में हेरफेर और टेंपरिंग को लेकर गहन पूछताछ की। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से कितनी रकम वसूली गई और इस अवैध कमाई का बंटवारा किन-किन लोगों के बीच हुआ। सीआईडी पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों, कोचिंग संचालकों और दलालों का संगठित नेटवर्क
सीआईडी की जांच में अब तक यह सामने आया है कि JPSC परीक्षा में पास कराने के लिए अधिकारियों, परीक्षा संचालन एजेंसी, कोचिंग संचालकों और दलालों का एक संगठित गिरोह सक्रिय था। यह गिरोह अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि रकम की वसूली सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, मार्कशीट और एडमिट कार्ड अपने पास रख लिए जाते थे। परीक्षा परिणाम घोषित होने और पूरी रकम मिलने के बाद ही ये दस्तावेज वापस किए जाते थे।

18 ठिकानों पर छापेमारी, ब्लैंक चेक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
इससे पहले सीआईडी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में बिचौलियों, मास्टरमाइंड और कोचिंग संचालकों से जुड़े 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ब्लैंक चेक बरामद किए गए।
जांच में सामने आया है कि ये ब्लैंक चेक अभ्यर्थियों से परीक्षा में सफलता की गारंटी के तौर पर लिए गए थे। योजना यह थी कि परिणाम आने के बाद इन चेकों में मनमाफिक राशि भरकर रकम निकाली जाए, लेकिन उससे पहले ही सीआईडी की कार्रवाई से पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो गया।
सीआईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस मामले में कई बड़े नामों के सामने आने तथा आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।





















