उपेक्षा का शिकार ‘धरती आबा’: झारखंड में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा बदहाल, स्थानीय लोगों में रोष

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डॉ प्रणव कुमार (बब्बू)

गुमला , झारखंड: झारखंड की अस्मिता के प्रतीक और महान क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा , जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ‘उलगुलान’ का नारा दिया था, आज अपनी ही धरती पर उपेक्षा के शिकार नजर आ रहे हैं। गुमला के  घाघरा ब्लॉक ऑफिस में स्थित भगवान बिरसा की एक स्टेच्यू में भगवान बिरसा मुंडा की एक प्रतिमा अत्यंत दयनीय स्थिति में दिखाई दे रही है। यह प्रतिमा न केवल जर्जर हो चुकी है, बल्कि इसके रखरखाव के अभाव में यह टूटती हुई प्रतीत हो रही है।

प्रतिमा की स्थिति और मुख्य बिंदु: टूटती संरचना:

गुमला के  घाघरा ब्लॉक ऑफिस में स्थित भगवान बिरसा की प्रतिमा स्थापित इस प्रतिमा का रंग-रोगन पूरी तरह उतर चुका है और आंखों के पास की दरारें ऐसी प्रतीत हो रही हैं जैसे ‘धरती आबा’ स्वयं अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहे हों।

रखरखाव का अभाव: प्रतिमा पर चढ़ाई गई मालाएं भी पुरानी हो चुकी हैं, ऐसा लगता है मानो वर्षो से यहाँ कोई सुध लेने वाला नहीं आया है।

धार्मिक और सांस्कृतिक चोट:

स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान बिरसा केवल एक ऐतिहासिक पात्र नहीं, बल्कि एक पूजनीय देवता हैं। उनकी मूर्ति की ऐसी दुर्दशा करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है।

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

एक तरफ सरकार जनजातीय गौरव दिवस मनाकर आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर महापुरुषों की मूर्तियों का यह हाल प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:

1. प्रतिमा का तुरंत  जीर्णोद्धार (Repair) कराया जाए।

2. प्रतिमा स्थल के आसपास साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।

3. आने वाले ‘स्थापना दिवस’ या विशेष अवसरों से पहले इसे नया स्वरूप दिया जाए।

स्थानीय लोग बताते है की भगवान बिरसा मुंडा हमारे आदर्श हैं। उनकी मूर्ति की यह हालत देखकर मन व्यथित है। यदि प्रशासन जल्द ही इसे ठीक नहीं कराता, तो समाज खुद पहल करेगा।”*

जाहिर है भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का इस तरह की अनदेखी हमारी विरासत के प्रति हमारी लापरवाही को दर्शाता है। उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस खबर का संज्ञान लेगा और ‘धरती आबा’ के सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए त्वरित कदम उठाएगा।

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