बोकारो में विस्थापितों का महासंग्राम: चंपई सोरेन ने दी ‘हल-बैल’ आंदोलन की चेतावनी, जोत दी जाएगी BSL की खाली जमीन
बोकारो में विस्थापितों का महासंग्राम: चंपई सोरेन ने दी ‘हल-बैल’ आंदोलन की चेतावनी, जोत दी जाएगी BSL की खाली जमीन
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बोकारो: झारखंड में विस्थापितों के हक और अधिकार की लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के प्रबंधन और सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब विस्थापित चुप नहीं बैठेंगे और अपनी जमीन पर हक वापस लेने के लिए खेतों में हल और बैल लेकर उतरेंगे।
नगड़ी की तर्ज पर होगा ऐतिहासिक आंदोलन
गांवों का दौरा कर विस्थापितों को गोलबंद कर रहे चंपई सोरेन ने कहा कि बोकारो में भी रांची के ‘नगड़ी’ जैसा ही उग्र और ऐतिहासिक विस्थापित आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि आगामी डेढ़ महीने के भीतर लाखों विस्थापित परिवार अपने हल, बैल और ट्रैक्टरों के साथ जुटेंगे और बोकारो स्टील प्लांट की उन जमीनों को जोतने का काम करेंगे, जिनका उपयोग पिछले कई दशकों से नहीं हुआ है।
34 हजार एकड़ जमीन और ‘2013 बिल’ का मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण कानून पर सवाल उठाते हुए कहा:
“भूमि अधिग्रहण बिल 2013 स्पष्ट कहता है कि यदि 5 साल तक अधिगृहीत जमीन का औद्योगिक उपयोग नहीं होता, तो उसे मूल रैयतों को वापस कर देना चाहिए। 1960-62 के दौरान करीब 34 हजार एकड़ जमीन ली गई थी, लेकिन आज भी हजारों एकड़ जमीन खाली पड़ी है। BSL को यह सरप्लस जमीन हर हाल में वापस करनी होगी।”
विस्थापितों की बदहाली और पलायन पर जताई चिंता
चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि विस्थापितों ने अपनी उपजाऊ जमीन देश के औद्योगिक विकास के लिए दे दी, लेकिन बदले में उन्हें केवल दर-दर की ठोकरें मिलीं।
नौकरी का संकट: पूर्व में चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में विस्थापितों के लिए आरक्षण था, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
पलायन की मजबूरी: रोजगार न मिलने के कारण जमीन दाता आज अपने ही क्षेत्र से पलायन करने को मजबूर हैं।
बोकारो और रामगढ़ में मचेगी हलचल
विस्थापितों को एकजुट करने के लिए चंपई सोरेन लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बार की लड़ाई केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहेगी। बोकारो और रामगढ़ सहित पूरे औद्योगिक बेल्ट में विस्थापितों का गुस्सा अब फूटने को तैयार है। सोरेन ने कहा, “यह विस्थापितों के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है, और हम इसे अंतिम परिणाम तक पहुँचाकर रहेंगे।”
ब्यूरो रिपोर्ट, बोकारो















