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झारखंड के पांच मजूदर नाइजर में अगवा..CM हेमंत सोरेन ने विदेश मंत्री से मांगी मदद

पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर में झारखंड के गिरिडीह जिले के पांच प्रवासी मजदूरों के अपहरण की घटना ने स्थानीय समुदाय और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। ये मजदूर—संजय महतो, फलजीत महतो, राजू महतो, चंद्रिका महतो और उत्तम महतो—गिरिडीह के बगोदर थाना क्षेत्र के दोंदलो और मुंडरो पंचायत के निवासी हैं। ये सभी कल्पतरु पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (KPTL) कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन के कार्य के लिए नाइजर गए थे। घटना 25 अप्रैल, को हुई, जब हथियारबंद समूह ने कंपनी के कार्यस्थल पर हमला किया, जिसमें सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई और इन पांच मजदूरों को अगवा कर लिया गया।

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पीड़ित परिवार

खबरों के अनुसार, 25 अप्रैल को नाइजर में KPTL कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट पर काम के दौरान हथियारबंद ग्रुप ने अचानक हमला बोला। इस हमले में सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई और पांचों मजदूरों को बंधक बना लिया गया। मजदूरों के परिजनों का कहना है कि अपहरण हथियारों के बल पर किया गया, और उन्हें इस घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही चिंता सता रही है। अभी तक अपहृत मजदूरों का कोई सुराग नहीं मिला है, और उनके परिवारजन उनकी सुरक्षित वापसी के लिए लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
गिरिडीह के दोंदलो और मुंडरो गांवों में मजदूरों के परिवार सदमे में हैं। उन्होंने पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप की अपील की, जिसके बाद सोरेन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मदद मांगी। सोमवार, 28 अप्रैल,  को गांववासियों ने केंद्र सरकार से औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि वे मजदूरों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करें। पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री और प्रशासन की भूमिका
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 27 अप्रैल,  को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने लिखा, “माननीय केंद्रीय विदेश मंत्री आदरणीय श्री
@DrSJaishankar जी से आग्रह है कि नाइजर में अगवा किए गए झारखण्ड के हमारे प्रवासी भाइयों को मदद पहुंचाने की कृपा करें।” इसके साथ ही, झारखंड सरकार के प्रवासी सेल और श्रम विभाग ने विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय शुरू कर दिया है।
सोरेन की अपील के बाद, झारखंड के गोड्डा सांसद
ने भी तत्काल कार्रवाई की बात कही। उन्होंने X पर पोस्ट किया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है और मजदूरों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय की भूमिका
विदेश मंत्रालय और नाइजर में भारतीय दूतावास को इस मामले की जानकारी दे दी गई है। हालांकि, अभी तक अपहृत मजदूरों के ठिकाने या उनकी स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह नाइजर सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मजदूरों की रिहाई के लिए तत्काल कदम उठाए।
चुनौतियां
नाइजर, पश्चिमी अफ्रीका का एक अस्थिर क्षेत्र, हाल के वर्षों में आतंकवादी और हथियारबंद समूहों की गतिविधियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में, विदेशी मजदूरों को निशाना बनाया जाना असामान्य नहीं है। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और विदेशों में उनके कार्यस्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की कमी जैसे मुद्दों को फिर से उजागर किया है। KPTL कंपनी ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे परिवारों और स्थानीय समुदाय में आक्रोश बढ़ रहा है।
परिवारों की मांग: मजदूरों के परिजन केंद्र और राज्य सरकार से उनकी सुरक्षित और शीघ्र वापसी की मांग कर रहे हैं। वे कंपनी से भी जवाबदेही की उम्मीद कर रहे हैं।
सरकारी प्रयास: झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय के जरिए नाइजर प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देख रहा है।
यह घटना न केवल पांच परिवारों के लिए त्रासदी है, बल्कि उन हजारों प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा को भी दर्शाती है जो बेहतर आजीविका के लिए विदेशों में काम करने जाते हैं। झारखंड और केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से उम्मीद है कि संजय, फलजीत, राजू, चंद्रिका और उत्तम जल्द ही अपने घर लौट सकेंगे। इस बीच, गांववासियों और परिजनों का इंतजार और चिंता बरकरार है।

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