साहेबगंज में आयोजित क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला : डॉल्फिन जनसंख्या आकलन के लिए वनकर्मियों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

साहेबगंज में आयोजित क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला : डॉल्फिन जनसंख्या आकलन के लिए वनकर्मियों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

साहेबगंज : गंगा नदी में गंगा डॉल्फिन (राष्ट्रीय जलीय जीव) के संरक्षण और सटीक जनसंख्या आकलन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, साहेबगंज एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

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यह कार्यशाला डॉल्फिन व्याख्या केंद्र, चानन में संपन्न हुई, जहां मुख्य अतिथि साहेबगंज वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग ने शुभारंभ किया। इस अवसर पर डीपीओ, नमामि गंगे अमित मिश्रा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यशाला में प्रोजेक्ट डॉल्फिन की वैज्ञानिक डॉ. सनी देउरी ने “रेंजवाइड नदीय एवं मुहाना क्षेत्र डॉल्फिन आकलन” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। डॉ. गर्ग ने डॉल्फिन संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक एवं मानकीकृत आकलन पद्धति अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वन कर्मियों और स्थानीय डॉल्फिन वॉचर्स।से अपील की कि वे प्रशिक्षण में बताई गई विधियों को गंभीरता से अपनाएं और भविष्य के सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

तकनीकी सत्रों में WII, देहरादून के शोधार्थियों ने डॉल्फिन गणना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया। भारतीय वन्यजीव संस्थान की सर्वेक्षण टीम ने फील्ड कर्मचारियों को सर्वेक्षण उपकरणों के संचालन और उपयोग की व्यावहारिक जानकारी दी।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गंगा नदी में फील्ड डेमोंस्ट्रेशन रहा, जहां चानन घाट पर प्रत्यक्ष रूप से आकलन प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को स्थल पर ही डॉल्फिन आकलन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जिससे प्रशिक्षण अधिक प्रभावी सिद्ध हुआ।

डॉ. सोभना रॉय (प्रोजेक्ट डॉल्फिन वैज्ञानिक, WII) ने भी कार्यशाला में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। वनरक्षी इन्द्रजीत एवं अंकित झा ने फील्ड अभ्यास के दौरान सक्रिय सहयोग दिया और सर्वेक्षण प्रक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नदीय एवं मुहाना डॉल्फिन की सटीक, वैज्ञानिक गणना सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ को मानकीकृत पद्धतियों से प्रशिक्षित करना था। इससे प्रोजेक्ट डॉल्फिन और गंगा संरक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी।

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