Allegation of negligence in treatment: Jacintha to move court against Shanti Bhawan Medical Center; hospital says it is unaware of the matter.

इलाज में लापरवाही का आरोप: शांति भवन मेडिकल सेंटर के खिलाफ कोर्ट जाएंगी जसीनता, अस्पताल ने कहा- मामले की जानकारी नहीं

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Allegation of negligence in treatment: Jacintha to move court against Shanti Bhawan Medical Center; hospital says it is unaware of the matter.
Allegation of negligence in treatment: Jacintha to move court against Shanti Bhawan Medical Center; hospital says it is unaware of the matter.

शंभू कुमार सिंह 

सिमडेगा: शहर के खूंटीटोली निवासी जसीनता ने शांति भवन मेडिकल सेंटर पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्यायालय जाने की घोषणा की है। उनका दावा है कि अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी हालत पहले से अधिक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें रांची के पारस अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वर्तमान में उनका इलाज और फिजियोथेरेपी जारी है।

जसीनता के अनुसार, 23 मई 2026 को पैर, जांघ और कमर में जलन की शिकायत होने पर वह स्वयं ऑटो से शांति भवन मेडिकल सेंटर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि इससे पहले रांची के पारस अस्पताल में दो बार परामर्श लिया था, जहां एमआरआई रिपोर्ट सामान्य बताई गई थी। उनका आरोप है कि अस्पताल में इंजेक्शन और दवाएं दिए जाने के बाद उनकी कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलाज से जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

जसीनता का कहना है कि डॉक्टर मोबाइल फोन के माध्यम से नर्सिंग स्टाफ को दवा और इंजेक्शन देने के निर्देश दे रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में उन्हें आईसीयू में रखा गया और अगले दिन शौचालय जाने के लिए उठने पर डॉक्टर के निर्देश का हवाला देकर नर्सों ने उन्हें रोक दिया। उनका दावा है कि जब उन्होंने उठने की कोशिश की तो उनका शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था, जबकि अस्पताल कर्मियों को उनकी स्थिति की जानकारी थी।

उन्होंने बताया कि 28 मई तक शांति भवन मेडिकल सेंटर में इलाज के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 29 मई को परिजन उन्हें रांची के पारस अस्पताल ले गए, जहां उनका इलाज शुरू हुआ। फिलहाल वह घर पर फिजियोथेरेपी करा रही हैं और चिकित्सकों ने आगे भी नियमित थेरेपी जारी रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इलाज का खर्च उठाना उनके परिवार के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है।

जसीनता ने एक अन्य मामले का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि खूंटीटोली की एक बच्ची की फूड प्वाइजनिंग के इलाज के दौरान 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद मौत हो गई थी। उन्होंने इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि इलाज पूरा होने के बाद वह अपने अधिवक्ता के माध्यम से शांति भवन मेडिकल सेंटर के खिलाफ कथित चिकित्सीय लापरवाही, मरीजों के साथ कथित गलत व्यवहार और अन्य आरोपों को लेकर न्यायालय में वाद दायर करेंगी।

अस्पताल का पक्ष

शांति भवन मेडिकल सेंटर के प्रतिनिधि विश्वजीत ने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। ऐसे में उन्हें जसीनता के मामले की विशेष जानकारी नहीं है, इसलिए वह इस संबंध में विस्तृत टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।

आदिवासी नेता ने भी उठाए सवाल

आदिवासी नेता दिलीप तिर्की ने कहा कि शांति भवन मेडिकल सेंटर में कथित अनियमितताओं को लेकर वह पहले भी न्यायालय का रुख कर चुके हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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