रांची के प्रतीक ऑटोमोबाइल्स महिंद्रा शोरूम में धोखाधड़ी का मामला: ग्राहकों ने लगाए गंभीर आरोप, पुलिस कार्रवाई की मांग
रांची : आकाश कुमार
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रांची, 17 जून : रांची के रातू, सिमलिया रिंग रोड पर स्थित प्रतीक ऑटोमोबाइल्स, एक महिंद्रा अधिकृत डीलरशिप, गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों के घेरे में है। दर्जनों ग्राहकों ने शोरूम पर लाखों रुपये जमा करने के बावजूद गाड़ी न मिलने, गलत रजिस्ट्रेशन नंबर और अनधिकृत ईएमआई कटौती जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ग्राहकों ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
आरोपों का विवरण
गाड़ी की डिलीवरी में विफलता
कई ग्राहकों ने बताया कि उन्होंने गाड़ी बुक करने के लिए लाखों रुपये जमा किए, लेकिन न तो उन्हें गाड़ी दी गई और न ही उनकी जमा राशि वापस की गई। कुछ प्रमुख शिकायतकर्ताओं में शामिल हैं:
जफर इकबाल (तुको बेड़ो): ₹3.40 लाख
प्रकाश कुमार (पिर्रा हेहल रोड): ₹3.79 लाख
बालेश्वर महतो (टेंडर टोंगरीटोला): ₹3.46 लाख
इन ग्राहकों ने रसीदें प्रस्तुत की हैं,
गलत रजिस्ट्रेशन नंबर
एक ग्राहक, विजय मिंज, ने आरोप लगाया कि शोरूम ने उन्हें जो गाड़ी दी, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर (JH01GA-3699) गलत और अवैध था। जांच में पाया गया कि यह नंबर वैध नहीं है, जिसके कारण ग्राहक गाड़ी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
अनधिकृत ईएमआई कटौती
कई ग्राहकों ने शिकायत की कि गाड़ी डिलीवर न होने के बावजूद उनके बैंक खातों से ईएमआई की कटौती शुरू हो गई। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ग्राहकों को पता चला कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया।

ग्राहकों की प्रतिक्रिया और शिकायतें
पीड़ित ग्राहकों ने इस मामले को रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के सामने 20 मई 2025 को एक ज्ञापन के माध्यम से उठाया था। हालांकि, उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद, ग्राहक रातू थाने पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। पीड़ितों का कहना है कि शोरूम ने उनके विश्वास का दुरुपयोग किया और उनकी मेहनत की कमाई को हड़प लिया।
प्रतीक ऑटोमोबाइल्स का पक्ष
शोरूम प्रबंधन का दावा है कि वे प्रशासन की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। प्रबंधन ने एक महीने पहले अपने ही कर्मचारी सनी साहू के खिलाफ केस किया है सनी साहू ही वह आरोपी है जिसने इन कस्टमर का पैसा हड़पा है। कंपनी के खाते में जमा राशि को वापस करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, कुछ राशि कर्मचारियों को सीधे दी गई थी, जिसके लिए शोरूम ने जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। यह बयान ग्राहकों के बीच और अधिक असंतोष का कारण बन रहा है। और कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं
पहला सवाल क्या प्रबंधन के खाते में जमा किए बिना गाड़ी शोरूम से बाहर निकलती है अगर नहीं निकलती है तो शोरूम से गाड़ी बाहर कैसे निकाली और फिर कस्टमर को गलत रजिस्ट्रेशन नंबर क्यों दिया गया
नियम कहता है कि गाड़ी शोरूम से बाहर निकालने के एक हफ्ते के अंदर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेवारी शोरूम की होती है क्या यह सही है तो फिर 6 महीने तक क्यों कस्टमर को परेशान किया गया
दूसरा सवाल कस्टमर जब कोटेशन लेकर बैंक के पास जाता है तो बैंक शोरूम से कोटेशन की जानकारी लेता है और यह कंफर्म करता है कि शोरूम का बैंक अकाउंट नंबर क्या है और पैसा किस खाते में डालना है तो आखिर ऐसा जब नहीं हुआ तो फिर कस्टमर के EMI कैसे काटे जा रहे हैं।
तीसरा सवाल क्या प्रबंधन की जिम्मेवारी नहीं है कि कस्टमर को अगर शोरूम के किसी एंप्लॉय ने ठगा है तो उन्हें जांच में सहायता कर पूरी जानकारी पुलिस के साथ शेयर की जाए आधी अधूरी जानकारी पुलिस को ना दिया जाए
क्या प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार किया अगर अच्छा व्यवहार किया होता तो फिर इतने कस्टमर नाराज होकर शोरूम के बाहर प्रदर्शन क्यों करते।
क्या कंज्यूमर कोर्ट में जाने की सलाह आप लोगों ने यानी प्रबंधन दिन किसी कस्टमर को दी अगर कस्टमर के साथ हुए भ्रष्टाचार में शोरूम शामिल नहीं है तो कस्टमर को कंज्यूमर कोर्ट जाने की सलाह तो प्रबंधन के द्वारा दिया जाना चाहिए ।
पीड़ित कस्टमर कई महीनो से पुलिस और शोरूम के चक्कर लगा रहा है लेकिन ना तो प्रबंध न ही पुलिस किसी भी कस्टमर की मदद कर पा रही है ऐसा क्यों
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
ग्राहकों ने रातू थाने में शिकायत दर्ज की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस मामले में ढिलाई बरत रहे हैं। कुछ ग्राहकों ने उपभोक्ता मंच और अन्य कानूनी रास्तों का सहारा लेने की बात कही है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यह मामला न केवल प्रतीक ऑटोमोबाइल्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि रांची में ऑटोमोबाइल डीलरशिप के प्रति ग्राहकों के विश्वास को भी प्रभावित कर रहा है। कई पीड़ित मध्यम वर्ग और मेहनतकश परिवारों से हैं, जिनके लिए जमा राशि उनकी जिंदगी भर की बचत का हिस्सा थी।
जाहिर है प्रतीक ऑटोमोबाइल्स के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप न केवल एक डीलरशिप की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं बल्कि आम लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर ऐसी कौन सी जगह है जहां ग्राहक ठगे नहीं जाते।