पत्रकार आदिल रशीद की माँ हसीना खातून का निधन, डोरंडा क़ब्रिस्तान में नमाज़ जनाजा अदा की गई.

पत्रकार आदिल रशीद की माँ हसीना खातून का निधन, डोरंडा क़ब्रिस्तान में नमाज़ जनाजा अदा की गई.

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रांची : पत्रकार आदिल रशीद की माता हसीना खातून का निधन होगया (इन्ना लीलाहे व इन्ना इलैहे राजीओंन)। मिट्टी मंज़िल 18 अप्रेल 2020 को बाद नमाज़ ज़ोहर डोरंडा ईदगाह क़ब्रिस्तान में नमाज़ जनाजा अदा की गई और वहीं सुपुर्द ए खाक किया गया। नमाज़ जनाजा हव्वारी मस्जिद कर्बला चौक के खतीब हजऱत मौलाना मुफ़्ती कमरे आलम ने पढ़ाई। ज्ञात हो की पत्रकार आदिल रशीद की मां गुरुवार से बीमार थी। घबराहट, बेचैनी शुरू हुआ। इनका इलाज झारखंड के मक़बूल डॉ डॉक्टर शहबाज़ आलम और डॉ एम हसनैन के निगरानी में घर पर ही चल रहा था। शनिवार शाम लगभग 6 बजे कलिमा तय्येबा पढ़ते हुए आखरी सांस ली। नेहयत नेक पारसा औरत जिन्होंने ऑक्सीजन लगने के बाद भी क़ुरआन पाक, सूरह यासीन, सूरह रहमान, और दरूद पढ़ती रहीं। और पढ़ते पढ़ते अल्लाह को प्यारी हो गई।

जैसे ही लोगो को पता चला कि पत्रकार आदिल रशीद की माँ का निधन हो गया और जनाजा घर पर ही है तो लोग उनके घर के तरफ चल पड़े। मौलाना सैयद तहजिबुल हसन रिज़वी ने कहा कि नबी अकरम की हदीस है कि नेक और सालेह लोगो को मौत भी बेहतरीन दिन में मिलती है। रमज़ान के महीना में मौत आना भी इंसान के नेक आमाल के दलील है। यह बहुत नेक पारसा औरत थी। वह अपने पीछे पति एच रशीद आज़ाद, 5 बेटा, इम्तियाज पाशा, आदिल रशीद, आबिद पाशा, आसिफ पाशा, अबु आमिर, 6 बेटी, नाती, पोता समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गई।

जनाजा में शामिल होने वालों में हज कमिटी के सदस्य मौलाना सैयद तहजिबुल हसन रिज़वी, सेंट्रल मुहर्रम कमिटी के अकिलुर्रह्मान, मक़बूल सर्जन डॉक्टर शहबाज़ आलम, जनरल फिजिशियन डॉक्टर एम हसनैन, डॉक्टर सिबगतुल्लाह, जमीयत उलेमा के शाह उमेर, एदारा ए शरिया के मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी, जमीयत उलेमा के मुफ़्ती कमरे आलम, आम जनता हेल्पलाइन के एजाज गद्दी, जदीद भारत के निदेशक एस एम खुर्शीद, खबर एक्सप्रेस के निदेशक सैयद जसीम रिज़वी, मो अकील, क़ारी अब्दुल हफीज़, क़ौमी इत्तेहाद मोर्चा के सैयद खुर्शीद अख्तर, हाजी माशूक़, हाजी सरवर, हाजी हलीम, आज़म अहमद, दानिश अयाज़, पत्रकार गुलाम शाहिद, शाहिद अय्यूबी, साजिद उमर, अब्दुल मनान, सैफुलहक़, अब्दुल ख़ालिक़, मौलाना मतीन, शहनवाज़ आलम, रेहान अख्तर, समेत सेंकडो लोग थे।

पत्रकार मोहम्मद आदिल रशीद कहते है कि अम्मी के इंतेक़ाल के बाद मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कैसे होगा। इस मुश्किल की घड़ी में डॉक्टर शहबाज़ आलम, मौलाना सैयद तहजिबुल हसन रिज़वी, डॉक्टर एम हसनैन, जनाब शाह उमेर, अकिलुर्रह्मान ने मेरी स्तिथि को जानते हुए माली(रुपए) मदद किया। इन सबके बदौलत अल्लाह ने सारा काम आसान कर दिया। हम सभी का शुक्रिया अदा करते हैं। जो मुश्किल के इस घड़ी में मेरे साथ रहे।

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