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झारखंड में नगर निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट की फटकार, हेमंत सरकार पर BJP का हमला

रांची: झारखंड में नगर निकाय चुनाव में बार-बार देरी को लेकर हेमंत सोरेन सरकार और उच्च न्यायालय के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के टालमटोल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को ठप करने वाला गंभीर अपराध करार दिया। कोर्ट ने सरकार को नगर निकाय चुनाव की अगली तारीख के लिए रोडमैप प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है।

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BJP के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन सरकार की नीयत लोकतंत्र को मजबूत करने की नहीं, बल्कि उसे कमजोर करने की है। सरकार जानबूझकर नगर निकाय चुनाव से भाग रही है ताकि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की भागीदारी खत्म हो और अफसरशाही व कमीशनखोरी का बोलबाला बना रहे।”

प्रतुल ने उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 4 जनवरी 2024 को कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि तीन सप्ताह के भीतर पूरे राज्य में नगर निकाय चुनाव कराए जाएं और ट्रिपल टेस्ट को बहाना न बनाया जाए। इसके बावजूद, सरकार ने इस आदेश की अवहेलना की और अपील दायर की, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया। 16 जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय ने दोबारा आदेश दिया कि अप्रैल 2023 में कार्यकाल समाप्त हो चुके नगर निकायों में मई 2025 तक हर हाल में चुनाव कराए जाएं। फिर भी, सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

उच्च न्यायालय ने सरकार की लापरवाही पर कई बार नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि ट्रिपल टेस्ट की आड़ में चुनाव टालना संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन है और यह “रूल ऑफ लॉ” की धज्जियां उड़ाने जैसा है। मंगलवार की सुनवाई में कोर्ट ने रांची नगर निगम की पूर्व पार्षद रोशनी खलखो द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को अगली तारीख के लिए रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया।

BJP की मांग: पिछड़ों को आरक्षण के साथ तत्काल हो चुनाव

प्रतुल शाह देव ने कहा कि BJP मांग करती है कि हेमंत सरकार तत्काल उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करे और पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देते हुए नगर निकाय चुनाव की तारीख घोषित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि अब और टालमटोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। “लोकतंत्र को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सरकार की मंशा पिछड़ों को उनका हक देने की नहीं थी, बल्कि ट्रिपल टेस्ट के नाम पर चुनाव टालने की थी,” उन्होंने कहा।

ट्रिपल टेस्ट में देरी का विवाद

नगर निकाय चुनाव में OBC आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रिपल टेस्ट अनिवार्य है। हालांकि, झारखंड सरकार ने इस प्रक्रिया को शुरू करने में देरी की, जिसके चलते अप्रैल 2023 में सभी नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी चुनाव नहीं हो सका। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने हाल के महीनों में 40 से अधिक निकायों में OBC सर्वेक्षण पूरा किया है, लेकिन प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

उच्च न्यायालय ने बार-बार सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि समय पर चुनाव न कराना संवैधानिक तंत्र की विफलता है और प्रशासकों के माध्यम से नगर निकायों को चलाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस आनंद सेन की पीठ ने मुख्य सचिव और नगर विकास सचिव की उपस्थिति में सरकार को फटकार लगाई और अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की।

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