Major relief for successful candidates from the High Court: Stay on the government's decision to cancel three recruitment processes, including the 11th-13th JPSC.

झारखंड: अलकतरा घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- दस्तावेज जुटाने में पूरी उम्र निकाल देती हैं जांच एजेंसियां

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करीब तीन दशक पुराने मामले में अब तक नहीं आया अंतिम फैसला, 32 आरोपियों में 12 की हो चुकी है मौत; सीबीआई की धीमी कार्यशैली पर अदालत ने जताई नाराजगी

रांची: झारखंड में करीब तीन दशक पुराने बहुचर्चित अलकतरा घोटाले की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि जांच एजेंसियां दस्तावेज जुटाने में ही पूरी उम्र निकाल देती हैं, जबकि मुकदमों के त्वरित निष्पादन की दिशा में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई देती।
वर्ष 1997 में एकीकृत बिहार के दौरान सामने आए इस घोटाले में तत्कालीन मंत्री इलियास हुसैन समेत कुल 32 लोगों को आरोपी बनाया गया था। मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 12 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि शेष 20 आरोपियों के खिलाफ अब भी मुकदमे की सुनवाई जारी है। इस स्थिति ने जांच और न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

झारखंड: अलकतरा घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- दस्तावेज जुटाने में पूरी उम्र निकाल देती हैं जांच एजेंसियां

सीबीआई की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की नाराजगी

झारखंड हाईकोर्ट में सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अलकतरा घोटाले की स्थिति सामने आई। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से बताया गया कि कई मामलों में गवाह अपने निर्धारित पते पर नहीं मिल रहे हैं। इस पर अदालत ने असंतोष जताते हुए जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट की टिप्पणी का संकेत साफ था कि केवल दस्तावेज जुटाने और गवाहों की तलाश में लंबा समय बिताने से मुकदमों का निष्पादन प्रभावित हो रहा है।

32 आरोपियों में 12 की मुकदमे के दौरान मौत

अलकतरा घोटाला उन पुराने भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल है, जिनकी जांच और सुनवाई कई वर्षों से चल रही है। मामले में 32 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। लेकिन न्यायिक प्रक्रिया में देरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 12 आरोपियों की मुकदमे के दौरान ही मौत हो गई। इसके बावजूद बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है। यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में जांच और सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था मौजूद है।

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निचली अदालत से दो मामलों के रिकॉर्ड तलब

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने निचली अदालत से दो मुकदमों के रिकॉर्ड तलब किए हैं। अदालत ने सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित मामलों की स्थिति पर भी गंभीरता दिखाई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसे मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर दिए जाने के बावजूद झारखंड में कई मामले अब भी लंबित हैं।

पुराने भ्रष्टाचार के मामलों में न्याय की रफ्तार पर सवाल

अलकतरा घोटाले की सुनवाई में हो रही देरी ने भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की गति को लेकर बहस तेज कर दी है। किसी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय आने में दशकों लगने से न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी इसी व्यापक चिंता को सामने लाती है।अब निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब किए जाने के बाद मामले की सुनवाई और आगे की न्यायिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।