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जमशेदपुर में हाई-प्रोफाइल अपहरण: कैरव गांधी के 11 दिन बीतने के बाद भी नहीं मिला सुराग, भाजपा ने उठाई CBI जांच की मांग।

जमशेदपुर में हाई-प्रोफाइल अपहरण: कैरव गांधी के 11 दिन बीतने के बाद भी नहीं मिला सुराग, भाजपा ने उठाई CBI जांच की मांग।

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कैरव कहीं हनी ट्रैप का शिकार तो नही हुआ ? पुलिस इस एंगल से भी जांच रही । 

जमशेदपुर, 23 जनवरी : झारखंड की स्टील सिटी जमशेदपुर में चर्चित अपहरण मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। प्रमुख उद्योगपति देवांग गांधी के 24 वर्षीय पुत्र कैरव गांधी  के घर BJP के कई  वरिष्ठ नेता पहुचे और परिवारवालों की हिम्मत बधाई । जिसमे पूर्व CM अर्जुन मुंडा , पूर्व CM रघुबर दास और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू शामिल है । जाहिर है की कैरव के अपहरण को 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। युवक 13 जनवरी को बिष्टुपुर क्षेत्र से ऑफिस जाते समय लापता हो गए थे। उनकी क्रेटा कार चांडिल के कांदर बेड़ा इलाके में NH-33 के पास लावारिस हालत में मिली थी।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

शुक्रवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अर्जुन मुंडा ने बिष्टुपुर सर्किट हाउस में परिवार से मुलाकात की। आदित्य साहू ने कहा, “झारखंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। सरकार आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर नहीं है।” उन्होंने 27 जनवरी को राज्य DGP से मुलाकात कर त्वरित कार्रवाई की मांग करने की बात कही।

रघुवर दास ने CBI जांच की मांग की, क्योंकि स्थानीय जांच से कोई परिणाम नहीं निकल रहा। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी जरूरी है।
भाजपा नेताओं ने परिवार को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और सरकार पर दबाव बनाने की बात कही।

अर्जुन मुंडा ने भी केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है ।

गौरतलब है की अपहरणकर्ताओं ने परिवार से 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक की फिरौती मांगी है। फिरौती की कॉल्स विदेशी नंबरों (जैसे इंडोनेशिया या थाईलैंड) से आई हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में WhatsApp के माध्यम से भी संपर्क हुआ। पुलिस ने इसे फिल्मी स्टाइल का अपहरण करार दिया है, जिसमें संदिग्धों ने पुलिस वर्दी या में युवक को अगवा किया।

जांच में हनी ट्रैप एंगल और महिला मित्र की संभावना भी तलाशी जा रही है।

जांच की अपडेट

झारखंड पुलिस ने SIT (विशेष जांच दल) गठित किया है, जिसमें जमशेदपुर SP कुमार शिवाशीष शामिल हैं। जांच अब बिहार तक पहुंच गई है:बिहार के अजय सिंह गिरोह, चोटू यादव-राकेश जॉन गैंग और चंदन सोनार पर शक गहराया है।
अपहरण में इस्तेमाल सफेद बोलेरो/स्कॉर्पियो का मालिक राजशेखर (नालंदा, बिहार) का नाम सामने आया है, जो फरार है।
तीन संदिग्धों (सोनारी निवासी सोनू सहित) को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
500+ CCTV फुटेज स्कैन किए गए, लेकिन ब्रेकथ्रू नहीं मिला।
CID भी जांच में शामिल हो गई है।

परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि 11 दिन बीतने के बावजूद कैरव का कोई पता नहीं चला। कुछ रिपोर्ट्स में हनी ट्रैप या व्यक्तिगत विवाद का ट्विस्ट भी उभरा है, लेकिन पुलिस इसे साइबर और इंटरस्टेट गैंग से जोड़ रही है।

यह मामला राज्य में जंगल राज के आरोपों को हवा दे रहा है, जहां विपक्ष सरकार पर अपराध नियंत्रण में नाकामी का इल्जाम लगा रहा है।परिवार और शहरवासियों की उम्मीद है कि जल्द ही कोई सकारात्मक खबर आए और कैरव सुरक्षित घर लौट आएं।

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