NHAI टोल घोटाला: ED की 7 राज्यों के 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, फर्जी सॉफ्टवेयर से सरकारी राजस्व में बड़े घोटाले का खुलासा
विशेष रिपोर्ट : राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल प्लाजा पर चल रहे एक बड़े वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशव्यापी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 14 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दिल्ली से जम्मू तक केंद्रीय एजेंसी का कसता शिकंजा
जांच एजेंसी की यह कार्रवाई दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में केंद्रित है। छापेमारी के दौरान टोल ऑपरेटिंग कंपनियों, उनसे जुड़े प्रमोटरों और ठेकेदारों के कार्यालयों व निजी आवासों को निशाना बनाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, जम्मू में जाने-माने टोल कलेक्शन ठेकेदार राकेश चौधरी के गांधी नगर स्थित आवास और त्रिकुटा नगर कार्यालय पर ईडी की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ दबिश दी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में आलोक सिंह नामक ऑपरेटर से जुड़े ठिकानों पर भी फॉरेंसिक और वित्तीय दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल जारी है।

फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए राजस्व की समानांतर चोरी
जांच में सामने आया है कि टोल ऑपरेटरों ने एनएचएआई द्वारा स्वीकृत आधिकारिक सॉफ्टवेयर को दरकिनार (बाईपास) कर दिया था। इसके स्थान पर टोल प्लाजा पर एक अनाधिकृत और समानांतर सॉफ्टवेयर स्थापित किया गया था।
उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा की गई शुरुआती जांच के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज किया था। शुरुआती खुलासे में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी कि लगभग 95 प्रतिशत वाहनों से टोल की वसूली इस अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए की जाती थी, जिसे सीधे ऑपरेटरों के निजी खातों में भेजा जाता था। वहीं, एनएचएआई के आधिकारिक सिस्टम पर केवल 5 प्रतिशत वाहनों की एंट्री दिखाकर नाममात्र का राजस्व दिखाया जाता था।
डिजिटल सबूत और वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने में जुटी टीम
ईडी के अधिकारी फिलहाल छापेमारी वाली सभी जगहों से हार्ड डिस्क, सर्वर डेटा, बैंक खातों के विवरण और बही-खातों को जब्त कर रहे हैं। जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान इस घोटाले से अर्जित ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध की कमाई) का पता लगाने और इसके पीछे काम करने वाले मुख्य सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े प्रमोटरों और अधिकारियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

















