झारखंड में मानसून की बेरुखी से किसान चिंतित: धान की रोपनी अटकी, अच्छी बारिश के लिए शुरू हुई ‘पहाड़ पूजा’

नीरज तिवारी /जमशेदपुर
जमशेदपुर : झारखंड में इस वर्ष मानसून का आगमन तो हुआ, लेकिन उसके बाद से बारिश की रफ्तार बेहद सुस्त बनी हुई है। मानसून आने के करीब दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में खेतों को पानी का इंतजार है। भीषण उमस और गर्मी से बेहाल आम लोगों के साथ-साथ राज्य का अन्नदाता किसान भी गहरी चिंता में है।
बारिश की भारी कमी, किसानों की बढ़ी परेशानी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक सामान्य से 62 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में राज्य में 170.3 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 65.5 एमएम बारिश ही रिकॉर्ड हुई है। धान के बिचड़े तैयार हो चुके हैं, लेकिन पर्याप्त पानी न होने के कारण किसान खेतों में धनरोपनी शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
आस्था का सहारा: पहाड़ पूजा की परंपरा
वैज्ञानिक पूर्वानुमानों के साथ-साथ झारखंड के ग्रामीण इलाकों में लोक आस्था भी हिलोरें मार रही है। अच्छी बारिश और फसल की कामना के लिए पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड सहित कई इलाकों में ‘पहाड़ पूजा’ का सिलसिला शुरू हो गया है।
हाल ही में चाकुलिया के 12 मौजा के ग्रामीणों ने जामीरा पहाड़ की पारंपरिक पूजा-अर्चना की। ग्रामीणों का मानना है कि पहाड़ देव की कृपा से ही अच्छी बारिश होती है और क्षेत्र में खुशहाली आती है।
आने वाली प्रमुख पहाड़ पूजा की तिथियां:
कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा: यह राज्य की सबसे बड़ी पहाड़ पूजाओं में गिनी जाती है, जो 4 जुलाई को आयोजित होगी। पूजा कमेटी ने जोर-शोर से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
गोटाशिला पहाड़ पूजा: माटियाबांधी पंचायत के घाघरा गांव में स्थित इस पहाड़ की पूजा 7 जुलाई को होगी। यहाँ की मान्यता इतनी गहरी है कि पूजा के दौरान झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अन्य महत्वपूर्ण पहाड़ों जैसे सातनाला, खोड़ीपहाड़ी और घोटिडूबा में भी जल्द ही पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा आयोजित की जाएगी।
मौसम विभाग ने दी राहत की खबर
लगातार सूखी जमीन और तपती गर्मी के बीच मौसम विभाग ने एक राहत भरी जानकारी साझा की है। विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। किसानों और आम लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सक्रिय होता मानसून न केवल उमस से राहत दिलाएगा, बल्कि खेती-किसानी के लिए भी वरदान साबित होगा।
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