Palamu Sikka Village News, Superstition death

पलामू में मौत के पीछे अधंविश्वास ! ओझा की दी हुई ‘राख’ बनी काल, 10 दिनों में एक ही घर की 5 अर्थियां उठीं

अंधविश्वास के खेल में एक ही परिवार के 5 लोगों ने गंवाई जान। ओझा की ‘राख’ बनी मौत की वजह? स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे।”

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श्रवण पांडे पलामू
पलामू: क्या अंधविश्वास के फेर में एक पूरा परिवार मौत के मुंह में समा गया? पलामू के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव से एक ऐसी खबर आई है जो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। महज 10 दिनों के भीतर कुलदीप महतो के परिवार के 5 सदस्यों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई है। मौत की इस पटकथा के पीछे जो तथ्य सामने आए हैं, वे मेडिकल साइंस और समाज दोनों के लिए बड़ा सवाल हैं।

इलाज के नाम पर ‘जहर’ का सेवन?

जांच में जुटी स्वास्थ्य विभाग की टीम के अनुसार, परिवार के सदस्यों को एक अजीब बीमारी हुई थी—शरीर में अचानक सूजन आना। लेकिन, अस्पताल जाने के बजाय परिवार के लोग लेस्लीगंज के पूर्णाडीह में एक ओझा-गुणी की शरण में चले गए।

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दावा है कि ओझा ने इलाज के नाम पर एक ‘विशेष भस्म’ (राख) दी थी। परिवार के लोग अंधभक्ति में डूबकर लगातार इस राख का सेवन कर रहे थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का प्राथमिक अनुमान है कि यही ‘राख’ मौत की सबसे बड़ी वजह हो सकती है। संभव है कि इस राख में कोई घातक ‘हेवी मेटल’ या जहरीला रासायनिक तत्व मौजूद हो, जिसने शरीर के आंतरिक अंगों को कुछ ही घंटों में बेकार कर दिया।

सिस्टम की सुस्ती और उठते सवाल

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हालांकि स्वास्थ्य विभाग अब हरकत में आया है और लैब टेस्टिंग के लिए सैंपल जुटाए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में हुए पोस्टमार्टम के बाद मृतकों के ‘विसरा’ (Viscera) सैंपल लिए गए थे, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इन्हें अब तक फॉरेंसिक लैब नहीं भेजा गया है। अगर जांच समय पर पूरी हो जाती, तो शायद कुछ जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

एक नजर में मौत का सिलसिला:

19 जून: कुलदीप महतो (मुखिया)
20 जून:बबीता कुमारी (बेटी)
26 जून:इंदु कुमारी (बेटी)
28 जून: श्वेता कुमारी (बहू)
29 जून:नकुल महतो (बेटा)

सिक्का गांव में अभी भी कई लोग इस रहस्यमयी बीमारी से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप कर रही है।

दृष्टि नाउ’ अपने सभी पाठकों से अपील करता है—बीमारी का इलाज सिर्फ विज्ञान और योग्य डॉक्टरों के पास है। झाड़-फूंक और ओझा-गुणी के चक्कर में पड़कर अपनी और अपने अपनों की जान जोखिम में न डालें।

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