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दुमका में पुलिस की दबंगई: दो वरिष्ठ पत्रकारों के साथ मारपीट,अपराधी की तरह थाने ले जाकर पीटा , जिलेभर में आक्रोश

दुमका में पुलिस की दबंगई: दो वरिष्ठ पत्रकारों के साथ मारपीट,अपराधी की तरह थाने ले जाकर पीटा , जिलेभर में आक्रोश

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दुमका, 28 दिसंबर : झारखंड के दुमका जिले में पुलिस की कथित दबंगई का एक गंभीर मामला सामने आया है। हंसडीहा थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर दो सीनियर पत्रकारों के साथ मारपीट, बदसलूकी और जबरन हिरासत में रखने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना से पूरे जिले के पत्रकार समुदाय में जबरदस्त रोष व्याप्त है और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले की बात कही जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, टाइम्स नाउ नवभारत के सीनियर पत्रकार मृत्युंजय पांडेय और न्यूज18 के पत्रकार नितेश वर्मा बीती रात ढाका मोड़ पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद कार से दुमका लौट रहे थे। रास्ते में हंसडीहा चौक पर ट्रैफिक जाम लगने के कारण दोनों पत्रकार अपनी गाड़ी से उतरकर जाम की वजह जानने लगे।आरोप है कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पहले तो पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की। जब दोनों ने अपना परिचय देते हुए मीडिया से जुड़े होने की जानकारी दी, तब भी पुलिसकर्मियों ने नहीं माना और थाना प्रभारी के नेतृत्व में उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

इसके बाद दोनों को जबरन हंसडीहा थाने ले जाया गया, जहां इन्हें पीटा गया और घंटों तक दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।पीड़ित पत्रकार मृत्युंजय पांडेय का कहना है कि उन्हें थाने में लंबे समय तक बैठाकर रखा गया और मानसिक रूप से परेशान किया गया।

स्थिति तब नियंत्रण में आई जब मामले की सूचना दुमका पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार को मिली। एसपी के दखल के बाद दोनों पत्रकारों को थाने से रिहा किया गया। सूत्र बताते हैं कि घटना की गंभीरता को देखते हुए कई थानों की पुलिस फोर्स और दो डीएसपी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हालात संभले।

इस घटना के बाद दुमका जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। विभिन्न पत्रकार संगठनों ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला करार देते हुए दोषी थाना प्रभारी व पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि पत्रकार अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, फिर भी पुलिस ने इस तरह का व्यवहार किया, जो निंदनीय है।

फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उम्मीद की जा रही है कि झारखंड पुलिस उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराएगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी। यह घटना मीडिया की सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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