गरीब, दिव्यांग एवं असहायों को मिल रहा सरकारी सेवाओं का लाभ.

गरीब, दिव्यांग एवं असहायों को मिल रहा सरकारी सेवाओं का लाभ.

Author drishtinow | Edited by drishtinow
Updated: Thu, 25 Mar 2021 03:18 PM (IST)

रांची : दिव्यांग प्रफुलित कंडुलना, जो आकांक्षी जिला में शामिल खूंटी के रानियां प्रखंड के जयपुर गांव में रहती हैं। अब घर बैठे ही हर महीने के अंतिम दिन सरकार द्वारा मिलने वाले पेंशन का लाभ उठा रहीं हैं। भले ही वह आखरी दिन रविवार ही क्यों न हो।

कुछ समय पहले, पेंशन को प्राप्त करने के लिये प्रफुलित कंडुलना को चार-पांच महीने में एक बार कई परेशानियों से जूझते हुए भाड़ा खर्च कर बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे,लेकिन अब और नहीं। ये संभव हुआ है, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त बैंकिंग सखी कोरोस्पोंडेंट या यूं कहें कि बीसी सखी की वजह से। प्रफुलित कंडुलना बताती है कि बीसी सखी गायत्री तो देवदूत बनकर मेरे जीवन आई। अब मैं घर बैठे पेंशन के पैसे उनसे ले सकती हूं। गायत्री जैसी करीब 3300 सखी मंडल की बहनें आज अपने गांव-पंचायत में बैंकिंग सखी कॉरेस्पॉन्डेंट के रुप में डोरस्टेप बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही है।

सरकार की मुहिम ला रही रंग
राज्य के ग्रामीण इलाकों में बैकिंग सुविधाओं को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम रंग ला रही है। बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी(बीसी सखी) अपने गांव- पंचायत में बैंकिंग सुविधाओं को सुलभ बनाने की जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के द्वारा विभिन्न बैंकों के साथ साझेदारी में बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी को राज्य के ग्रामीण इलाकों में पदस्थापित किया गया है।राज्य सरकार द्वारा सखी मंडल की बहनों को चयनित एवं प्रशिक्षित किया जा रहा है ।

इस पहल से एक ओर सुदूर ग्रामीण इलाकों में जहां बैंक की पहुंच नहीं हैं,वहां के लोगों को अब बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी के माध्यम से बैंकिग सुविधाएं मिलने लगी है। वहीं, सखी मंडल की बहनों को भी बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी के रुप में एक नया रोजगार मिला है। इससे उनकी 6 से 12 हजार रुपये तक की मासिक आमदनी हो रही है।

बीसी सखी के जरिए घर-घर पहुंचती बैंकिंग सेवाएं
रांची के ओरमांझी प्रखण्ड की सोनी देवी सखी मंडल की एक सक्रिय सदस्य है और वो करीब दो साल से बीसी सखी के रुप में गांवों को बैंकिग सेवाएं दे रही है। ग्राहकों के बढ़ते तादाद को देखते हुए हाल ही में सोनी देवी ने अपना बैंकिंग सेवा केंद्र भी खोला है। सोनी देवी अब रोजाना 40 से 50 लोगों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ती है।

सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज सोनी देवी कहती हैं कि वे बीसी सखी के रुप में, हर महीने करीब 25 लाख रुपये का लेन-देन करती हैं। इससे, एक ओर उन्हें करीब 8 हजार की आमदनी हो जाती है, वहीं उन्हें इस बात की खुशी है कि बुजर्गों को वे उनके घर जाकर पेंशन उपलब्ध करा रही हैं।

ओरमांझी स्थित गगारी गांव की 80 वर्षीय बिपति देवी कहती हैं “ मैं अब चलने-फिरने में सक्षम नहीं हूँ लेकिन घर बैठे ही बी.सी.सखी के माध्यम से बैंकिंग सेवाएँ आसानी से प्राप्त हो जाती है। वृद्धा पेंशन समय-समय पर बी.सी.सखी आकर उपलब्ध करा देती है। वहीं इससे पहले निकासी के लिए बैंक जाना पड़ता था तो काफी परेशानी होती थी।”

लगभग एक अरब का लेनदेन हो रहा सुनिश्चित
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल की दीदियों को प्रशिक्षित कर बीसी सखी के रुप में स्वरोजगार व रोजगार से जोड़ा जा रहा है। सखी मंडल की बहनें अपने गांव-पंचायत में बैंकिंग सखी कॉरेस्पॉन्डेंट के रुप में डोरस्टेप बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही है। इनके द्वारा मनरेगा मजदूर, पेंशन, बैंक खाता, छात्रवृति, सरकारी योजनाओं की राशि का भुगतान एवं समूहों के लेन-देन के कार्य किया जा रहा है।

बैंक वाली दीदियाँ अब हर महीने राज्य के गांव-पंचायत में रहने वाले करीब 2.5 लाख लोगों तक बैंकिग सुविधाएं पहुंचा रही है। इससे तकरीबन 90 से 100 करोड़ रुपये का लेन-देन सुनिश्चित हो रहा है। बीसी सखी अपने लैपटॉप एवं पीओएस मशीन के जरिए गांव तक बैंक में मिलने वाली हर सुविधा से लोगों को आच्छादित कर रहीं हैं। यही वजह है कि सुदूर गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं भी आम आदमी तक पहुंच पा रही है।

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