रांची: विश्वास का कत्ल! 8 साल जिस घर को माना अपना, वहीं मिली मौत; इंस्टाग्राम दोस्ती बनी हत्या की वजह

रांची: विश्वास का कत्ल! 8 साल जिस घर को माना अपना, वहीं मिली मौत; इंस्टाग्राम दोस्ती बनी हत्या की वजह

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रांची: विश्वास का कत्ल! 8 साल जिस घर को माना अपना, वहीं मिली मौत; इंस्टाग्राम दोस्ती बनी हत्या की वजह

रांची: विश्वास का कत्ल! 8 साल जिस घर को माना अपना, वहीं मिली मौत; इंस्टाग्राम दोस्ती बनी हत्या की वजह

 

रातू (रांची): राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मुँहबोले भाई ने भरोसा तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक शक के नाम पर एक 13 साल की मासूम बच्ची, राजनंदिनी की हत्या कर दी गई। जिस परिवार को बच्ची ने पिछले 8 वर्षों से अपना सब कुछ माना था, उसी परिवार ने उसकी जान ले ली और साक्ष्य छिपाने के लिए शव को पड़ोसी राज्य बिहार के गया ले जाकर अंतिम संस्कार भी कर दिया।

गरुड़ पुराण का पाठ कराकर रची गुमराह करने की साजिश
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि 13 मार्च की रात को ही राजनंदिनी के मुंहबोले भाई राहुल उर्फ अक्षय ने उसकी हत्या कर दी थी। इस जघन्य अपराध को छिपाने के लिए आरोपी सुबोध पाठक के परिवार ने एक सोची-समझी साजिश रची। हत्या के बाद आरोपी तीन दिनों तक फरार रहे और लौटने के बाद ग्रामीणों को बच्ची के गायब होने की झूठी कहानी सुनाई। शक न हो, इसलिए घर के बंद कमरे में ‘गरुड़ पुराण’ का पाठ भी कराया गया।

इंस्टाग्राम दोस्ती , शक, और समाज मे झूठी प्रतिष्ठा 

एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित विशेष टीम की पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हत्या की वजह बताते हुए आरोपियों ने कहा कि मृतका इंस्टाग्राम के जरिए राहुल पाठक के साले के संपर्क में थी। दोनों के बीच बढ़ती नजदीकी से परिवार के मन मे शक पैदा हो गया। उन्हें  अपनी झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा खोने का डर सताने लगा  यही कारण रहा उन्होंने बच्ची को रास्ते से हटाने का खौफनाक फैसला लिया।

सीसीटीवी और टोल प्लाजा से खुला राज

पुलिस ने इस मामले का खुलासा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर किया। टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में उस एम्बुलेंस (JH-01-AA-1245) की पहचान हुई, जिससे शव को गया ले जाया गया था। एम्बुलेंस चालक पिंटू कुमार सिंह ने बताया कि सुबोध पाठक ने उसे यह कहकर गुमराह किया था कि उसकी बेटी की मृत्यु हो गई है।

बेहतर भविष्य के नाम पर लाया था रांची

राजनंदिनी के असली पिता औरंगाबाद के दिनेश मंइवार हैं, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। परिचित होने के नाते सुबोध पाठक उसे बेहतर पालन-पोषण का वादा कर रांची लाया था। सुबोध ने बच्ची के आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा रखा था। पिछले 8 सालों से वह उन्हें ‘फूफा’ कहकर बुलाती थी और उसी परिवार को अपना असली परिवार मानती थी।

एक नजर में मुख्य जानकारी:
मृतका: राजनंदिनी (13 वर्ष), मूल निवासी अंबा, औरंगाबाद (बिहार)।
आरोपी: सुबोध पाठक और राहुल पाठक (गिरफ्तार)।
पुलिस कार्रवाई: कांड संख्या  BNS) के तहत मामला दर्ज।
बरामदगी: घटना में प्रयुक्त एम्बुलेंस और दो मोबाइल फोन जब्त।

रांची से ‘दृष्टि नाउ’ के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।

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