महागठबंधन में शामिल हुईं रालोजपा और जेएमएम ! तेजस्वी यादव के आवास पर बड़ा फैसला
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच महागठबंधन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पटना स्थित सरकारी आवास (1 पोलो रोड) पर हुई महागठबंधन की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) महागठबंधन के साथ मिलकर बिहार में चुनाव लड़ेंगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैठक में लिया गया फैसला
तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी सहित महागठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक में रालोजपा और जेएमएम को गठबंधन में शामिल करने का निर्णय लिया गया। यह फैसला बिहार में विपक्षी गठबंधन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सीट बंटवारे पर चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सीट बंटवारे को लेकर भी गहन मंथन हुआ। रालोजपा और जेएमएम के गठबंधन में शामिल होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन दोनों दलों को कितनी सीटें दी जाएंगी। बिहार में महागठबंधन के अन्य सहयोगी दल, जैसे वीआईपी और वामपंथी दल, पहले ही अधिक सीटों की मांग कर चुके हैं। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने 60 सीटों की मांग की है, जबकि वामपंथी दल 2020 के विधानसभा चुनाव में मिली 29 सीटों से अधिक की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में सीट बंटवारा एक जटिल मुद्दा बन सकता है।
तेजस्वी और पारस की मुलाकात
कुछ दिनों पहले तेजस्वी यादव ने पशुपति पारस से मुलाकात की थी, जिसके बाद रालोजपा के महागठबंधन में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। तेजस्वी ने इस मुलाकात के दौरान सहयोगी दलों के साथ रालोजपा और जेएमएम को गठबंधन में शामिल करने पर विचार-विमर्श करने की बात कही थी। शनिवार की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग गई।
जेएमएम का बिहार में प्रभाव
झारखंड मुक्ति मोर्चा का बिहार के उन क्षेत्रों में खासा प्रभाव है जो झारखंड की सीमा से सटे हैं, जैसे भागलपुर, बांका, मुंगेर, तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, ठाकुरगंज, रुपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती और चकाई। जेएमएम ने पहले भी बिहार में उम्मीदवार उतारे हैं और 2010 में चकाई सीट पर जीत दर्ज की थी। हेमंत सोरेन की उपस्थिति से बिहार के आदिवासी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक वोटरों को एकजुट करने में मदद मिल सकती है।
पशुपति पारस का महागठबंधन से जुड़ना
पशुपति पारस ने पहले एनडीए के साथ गठबंधन में रहकर राजनीति की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 में उनकी पार्टी को एक भी सीट न मिलने के बाद उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद से ही उनके महागठबंधन में शामिल होने की चर्चा थी। जनवरी 2025 में लालू प्रसाद यादव और तेज प्रताप यादव के साथ दही-चूड़ा भोज में उनकी मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दी थी।
तेजस्वी यादव ने कहा, “पशुपति पारस और हेमंत सोरेन की पार्टियों ने धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के मुद्दों को लेकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। हमने सहयोगी दलों के सामने यह प्रस्ताव रखा है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। हमारा मकसद बिहार में एनडीए को हराना और राज्य को प्रगति के पथ पर ले जाना है।”

















