बिहार विधानसभा चुनाव 2025: महागठबंधन में सीट बंटवारे का विवाद; AIMIM के 32 सीटों पर दावे से बढ़ी टेंशन

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी महागठबंधन (INDIA गठबंधन) में सीट बंटवारे को लेकर विवाद ने जोर पकड़ लिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, वीआईपी और लेफ्ट दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं, जबकि कांग्रेस ने 13 अक्टूबर तक फैसला न होने पर अलग रास्ता अपनाने की चेतावनी जारी की है। इसी बीच, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 32 सीटों पर उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर महागठबंधन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

महागठबंधन की आंतरिक कलह अब साफ नजर आ रही है। आरजेडी, जो गठबंधन का सबसे बड़ा दलों में से एक है, ने 2020 के चुनावों में 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 पर जीत हासिल की थी। लेकिन अब सहयोगी दलों की बढ़ती मांगों से सीटों का बंटवारा जटिल हो गया है। कांग्रेस 70 सीटों की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि आरजेडी केवल 52-55 सीटें देने को तैयार है। वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश साहनी ने 25 सीटों की मांग की है, वहीं लेफ्ट दलों ने मिलकर 30-40 सीटों का दावा ठोंका है। हाल ही में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (LJP-Paras) जैसे नए सहयोगियों के शामिल होने से कुल आठ दलों वाला यह गठबंधन और जटिल हो गया है।

कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा, “हमें सम्मानजनक हिस्सा चाहिए, जिसमें जीतने लायक सीटें शामिल हों। नए सहयोगियों को जगह देने के लिए सबको अपनी हिस्सेदारी में कटौती करनी होगी।” वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में कहा था कि अगर सहमति न बनी तो पार्टी सभी 243 सीटों पर लड़ेगी। तेजस्वी ने महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में खुद को प्रोजेक्ट किया है, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पर अस्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।

विवाद के बीच AIMIM ने बम फोड़ दिया है। पार्टी के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने 11 अक्टूबर को 32 सीटों पर उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, जिसमें 16 जिलों से नाम शामिल हैं। AIMIM का दावा है कि वह कुल 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बिहार में ‘तीसरा मोर्चा’ गढ़ेगी। इमान ने कहा, “NDA और महागठबंधन दोनों को हमारी मौजूदगी महसूस होगी। 2020 में हमने धर्मनिरपेक्ष वोटों को बांटा था, लेकिन अब ऐसा आरोप नहीं लगेगा।”

AIMIM ने पहले महागठबंधन में शामिल होने के लिए लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को पत्र लिखे थे, लेकिन जवाब न मिलने पर स्वतंत्र रास्ता चुना। पार्टी मुख्य रूप से सीमांचल क्षेत्र पर फोकस कर रही है, जहां मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है। 2020 में AIMIM ने 20 सीटों पर लड़ीं और 5 जीतीं, लेकिन चार विधायकों ने बाद में आरजेडी जॉइन कर ली। विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM के अकेले चुनाव लड़ने से महागठबंधन के मुस्लिम-यादव वोट बैंक पर असर पड़ेगा, खासकर सीमांचल की 24 सीटों पर।

दूसरी ओर, सत्ताधारी NDA ने सीट बंटवारे पर सहमति बना ली है और इसकी जल्द घोषणा की उम्मीद है। भाजपा, जेडीयू, लोजपा (राम) और अन्य सहयोगी दलों के बीच बातचीत पूरी हो चुकी है। बिहार भाजपा प्रमुख ने कहा, “हमारी एकजुटता विपक्ष की कमजोरी को उजागर करेगी।”


















