बिहार विधानसभा चुनाव: महागठबंधन में सीट बंटवारे पर उलझा पेच, नामांकन से ठीक पहले बढ़ी टेंशन, छोटे दलों ने बढ़ाई मुश्किलें

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बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों के लिए नामांकन भरने की अंतिम तिथि नजदीक आते ही विपक्षी महागठबंधन में हलचल तेज हो गई है। सिर्फ दो दिन शेष रहते हुए भी आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है। कांग्रेस 60 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने पर अड़ी हुई है, जबकि आरजेडी 58 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं। इस टकराव ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां सीटों की संख्या से ज्यादा सियासी जमीन पर शह-मात का खेल चल रहा है।

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महागठबंधन में आरजेडी के अलावा कांग्रेस, वामपंथी दल (सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई-एमएल) और मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। कुल 243 सीटों वाले बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, जबकि 14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे। नामांकन की समय सीमा नजदीक आने से गठबंधन पर दबाव बढ़ गया है, और सूत्रों के मुताबिक आज (बुधवार) पटना में घोषणा हो सकती है।

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कांग्रेस की जिद साफ है—वह दलित-मुस्लिम (डीएम) समीकरण वाली सीटों पर मजबूत पकड़ बनाना चाहती है। खासकर सीमांचल क्षेत्र की अधिकतम सीटें मांग रही है, जहां मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है। 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर लड़ाई लड़ी थी और 19 पर जीत हासिल की थी, जबकि आरजेडी ने 144 सीटों पर उतरकर 75 सीटें जीतीं। इस बार कांग्रेस 65 सीटें मांग रही है, लेकिन आरजेडी सिर्फ 55-58 तक सीमित रखना चाहती है। आरजेडी को डर है कि अपनी मजबूत जमीन पर कांग्रेस को ज्यादा जगह देने से भविष्य में चुनौती बढ़ सकती है।

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दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमिटी की बैठक हुई, जहां सीट शेयरिंग पर चर्चा हुई। कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा, “हर विधानसभा क्षेत्र पर सावधानीपूर्वक चर्चा हो रही है, और कल सुबह तक फॉर्मूला घोषित हो सकता है।” आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी सोशल मीडिया पर संकेत दिए हैं कि जल्द ही फैसला होगा। सोमवार को तेजस्वी ने कांग्रेस नेताओं केसी वेणुगोपाल, राजेश राम और शकील अहमद से दिल्ली में मुलाकात की थी। हालांकि खबरों के अनुसार राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो पाई।

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सीट बंटवारे की उलझन सिर्फ कांग्रेस-आरजेडी तक सीमित नहीं। वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी 20 सीटें मांग रहे हैं, जबकि गठबंधन उन्हें 12-15 तक सीमित रखना चाहता है। वामपंथी दलों को 19 सीटें मिलने की संभावना है, जो 2020 जितनी ही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “नए सहयोगियों को समायोजित करने में समय लग रहा है। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भरोसा जताया कि एक-दो दिनों में सहमति बन जाएगी।

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नामांकन की समय सीमा से ठीक पहले यह टकराव गठबंधन की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि देरी से छोटे दलों में नाराजगी बढ़ सकती है, जो वोटों के ध्रुवीकरण को नुकसान पहुंचाएगी। महागठबंधन अगर जल्द घोषणा करता है, तो चुनावी रणनीति पर असर पड़ेगा, वरना स्वतंत्र उम्मीदवारी बढ़ सकती है।

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