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कोरोंजो जतरा ठेकेदारी पर अमृत चिराग का तीखा हमला, विधायकों की चुप्पी पर सवाल

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा जिले में पेसा कानून (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ठेठईटांगर प्रखंड में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ कार्यक्रम के दौरान मंच से कांग्रेस के विधायकों ने आदिवासी अस्मिता, संविधान और पेसा कानून की जोरदार वकालत की, लेकिन उसी क्षेत्र में हुए कथित उल्लंघन पर अब वे कटघरे में खड़े हैं।

भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के जिलाध्यक्ष अमृत चिराग तिर्की ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के सिमडेगा विधायक और कोलेबिरा विधायक की मौजूदगी में पेसा की बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन ठेठईटांगर प्रखंड सभागार में ग्राम सभा को पूरी तरह बाईपास कर ठेकेदारी आधारित डाक प्रक्रिया से कारोंजो जतरा (मेला) की बंदोबस्ती की गई। इसे उन्होंने कांग्रेस की ‘कथनी और करनी’ में खुला विरोधाभास करार दिया।

तिर्की ने विस्तार से बताया कि पेसा कानून 1996 के अध्याय 16 की धारा 34 ग्राम सभा को हाट-बाजार और मेला प्रबंधन का स्पष्ट अधिकार देती है। इसके अलावा, झारखंड पेसा नियमावली 2026 (जो हाल ही में लागू हुई है) की धारा 38 के अनुसार, पेसा लागू क्षेत्रों में इससे असंगत कोई भी पुराना कानून, नियम या संकल्प स्वतः निरस्त हो जाता है। फिर भी, झारखंड राजस्व एवं भूमि सुधार संकल्प 2015 (जो पेसा से टकराता है) के आधार पर ठेकेदारी प्रक्रिया अपनाई गई, जो संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून का सीधा उल्लंघन है।

मेला की डिटेल्स और आरोप

– कारोंजो जतरा 7 फरवरी से 9 फरवरी 2026 तक तीन दिवसीय आयोजित होना है।
– प्रखंड सभागार में ₹34,000 की राशि तय कर ठेकेदारी से बंदोबस्ती की गई।
– प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा नोटिस जारी कर अंचल पदाधिकारी की मौजूदगी में डाक प्रक्रिया पूरी की गई।
– पश्चिमी जिला परिषद सदस्य अजय एक्का की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

अमृत चिराग तिर्की ने कांग्रेस विधायकों पर सीधा निशाना साधते हुए पूछा, “जो विधायक मंच से आदिवासी अस्मिता, संविधान और पेसा कानून की दुहाई देते हैं, वे पेसा के खुले उल्लंघन पर चुप क्यों हैं? क्या ठेकेदारी व्यवस्था और प्रशासनिक मिलीभगत अब आदिवासी अधिकारों से ऊपर हो गई है?”

भारत आदिवासी पार्टी ने मांग की है कि ठेठईटांगर प्रखंड में हुई इस ‘अवैध’ डाक/बंदोबस्ती प्रक्रिया को तत्काल रद्द किया जाए और ग्राम सभा के अधिकार बहाल किए जाएं। पार्टी ने स्पष्ट कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे न्यायालय का रुख करेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तिर्की ने जोर देकर कहा, “पेसा कानून भाषणों की शोभा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज का संवैधानिक अधिकार है।”

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