सिमडेगा गांधी मेला में ठेकेदारों की मनमानी: दूर-दराज के व्यापारियों से धोखाधड़ी, एक्सटेंशन के नाम पर वसूली
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा जिले में महात्मा गांधी के नाम पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर लगने वाला गांधी मेला अब ठेकेदारों की मनमानी और धोखाधड़ी का शिकार बनता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मेले के ठेकेदारों ने इस बार भी कोलकाता, हरियाणा, दिल्ली और बंगाल जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से आए व्यापारियों और खेल-तमाशा वालों के साथ छल किया है। मूल रूप से 6 दिनों के लिए प्रस्तावित मेले को 10 दिवसीय एक्सटेंशन के नाम पर बुलाकर उनसे अतिरिक्त पैसे वसूले गए, लेकिन वास्तव में ऐसा कोई विस्तार नहीं हुआ। प्रभावित व्यापारियों ने इस पर धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान का मामला दर्ज करने की मांग की है।
गांधी मेला की शुरुआत ऐतिहासिक महत्व और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी, साथ ही कृषि और पशुपालन को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य था। करीब ढाई दशक पहले तक इस मेले में पशुपालन प्रदर्शनी का प्रमुख स्थान था, लेकिन ठेकेदारी प्रथा लागू होने के बाद प्रशासनिक उपेक्षा और ठेकेदारों की लापरवाही से यह पूरी तरह समाप्त हो गई। अब मेले की साख पर बट्टा लग रहा है, क्योंकि ठेकेदार मेले को बर्बाद करने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि मेले की नीलामी में ऊंची बोली लगने के कारण एक्सटेंशन की चर्चा तो हुई, लेकिन ठेकेदारों की आपसी सांठगांठ से यह सिर्फ व्यापारियों को ठगने का माध्यम बन गया। प्रमुख ठेकेदारों में मो. शाकिर, सत्येंद्र शर्मा, अवधेश प्रसाद समेत दर्जनभर लोग शामिल हैं, जो हर साल मुनाफा कमाकर निकल जाते हैं। बाहर से आए व्यापारियों से झूले, खेल-तमाशा और दुकानों के लिए आधे से अधिक पैसे पहले ही वसूल लिए जाते हैं, और उन्हें 10 दिनों के मेले का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन मेले की समाप्ति पर ये व्यापारी ठगे रह जाते हैं, जिससे सिमडेगा और गांधी मेले की छवि दोनों खराब हो रही है।
व्यापारियों के हितों की रक्षा करने वाली संस्था चैंबर ऑफ कॉमर्स भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि चैंबर मेले में आए इन बाहरी कारोबारियों से कोई संपर्क या सहायता नहीं करता, जो सीधे-सीधे उनके हितों के साथ धोखा है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम दूर से आते हैं, लेकिन ठेकेदारों की वजह से हर बार नुकसान होता है। प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
जिला प्रशासन से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोग मेले की पुरानी गरिमा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। यदि ठेकेदारों पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह ऐतिहासिक मेला पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

















