सुप्रीम कोर्ट ने UGC समता संवर्धन विनियम 2026 पर लगाई त्वरित रोक: कैलाश यादव ने कहा – असमानता के कारण रोहित वेमुल्ला और पायल तड़पकर मरे, समानता संवर्धन जरूरी
रांची : झारखंड प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ (समता संवर्धन विनियम 2026) को फिलहाल स्थगित (स्टे) कर दिया है। अदालत ने इन नियमों को ‘अस्पष्ट’, ‘दुरुपयोग की संभावना से भरा’ और ‘समाज को बांटने वाला’ बताया, जबकि पुराने 2012 के नियम लागू रहेंगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कैलाश यादव ने कहा, “यह फैसला मोदी सरकार के चेहरे पर तमाचा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया था कि ये नियम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बने हैं और इनमें कोई भेदभाव नहीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें ‘too sweeping’ और ‘capable of misuse’ करार दिया। यह साफ दिखाता है कि सरकार ने समानता के नाम पर भेदभाव को बढ़ावा देने की कोशिश की।”
यादव ने आगे कहा, “देश में असमानता और जातिगत भेदभाव के कारण ही हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुल्ला और पायल जैसों को अपनी जान गंवानी पड़ी। UGC के इन नए नियमों का मकसद SC, ST, OBC छात्रों को उच्च शिक्षा में सुरक्षा और समान अवसर देना था, लेकिन स्वर्ण समाज के विरोध के चलते सरकार पीछे हट गई। राइट टू इक्विटी और राइट टू इक्वालिटी के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सकारात्मक है, लेकिन ‘बटोगे तो कटोगे’ जैसे बयानों पर भी अदालत को संज्ञान लेना चाहिए, जो सामाजिक भेदभाव फैला रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने यह नियम राजनीतिक लाभ के लिए लाए, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों (दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश) को ध्यान में रखते हुए। “महंगाई, रुपए का 92 तक गिरना, सोने-चांदी की कीमतों में उछाल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब होने जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे नाकाम कर दिया।”
यादव ने कहा, “भारतीय समाज अभी भी सहिष्णु और न्यायप्रिय नहीं बना है। यूरोपीय समाजों की तरह हमें समानता की दिशा में बढ़ना होगा। राजद हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और बहुपयोगी एकता के पक्ष में रहा है। असमानता दूर करने के प्रयास जारी रहने चाहिए, अन्यथा रोहित वेमुल्ला जैसे मामले दोहराए जाते रहेंगे।”

















