यूजीसी का नया नियम विवादों में ! सोशल मीडिया में बहस छिड़ी । सामान्य वर्ग की अनदेखी ! हालांकि UGC नियम उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव रोकने के लिए सख्त कदम

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यूजीसी का नया नियम विवादों में ! सोशल मीडिया में बहस छिड़ी । सामान्य वर्ग की अनदेखी ! हालांकि UGC नियम उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव रोकने के लिए सख्त कदम

यूजीसी का नया नियम विवादों में ! सोशल मीडिया में बहस छिड़ी । सामान्य वर्ग की अनदेखी ! हालांकि UGC नियम उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव रोकने के लिए सख्त कदम

नई दिल्ली, 23 जनवरी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को एक नया नियम जारी किया है, जिसका नाम है “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026” (University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026)। यह नियम उसी दिन से लागू हो गया है और देश के सभी कॉलेजों, यूनिवर्सिटियों तथा अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) पर लागू होता है।यह नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेता है। लेकिन आने के साथ ही यह विवादों में है । सोशल मीडिया में इस नियम को लेकर कई तरह के विवाद सामने आ रहे है । यह ट्विटर पर भी ट्रेंड कर रहा है । हालांकि इस नियम को सामान्य वर्ग नाराज है और कई स्तरों पर विरोध के स्वर सामने आ रहे है । हालांकि UGC के अनुसार इसका मुख्य मकसद कैंपस में जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान, नस्ल या विकलांगता के आधार पर होने वाले किसी भी भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना है। खासकर SC, ST, OBC, EWS और दिव्यांग (PwD) जैसे कमजोर वर्गों को सुरक्षा देना और सभी को बराबर मौके उपलब्ध कराना। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के साथ जुड़ा हुआ है

विवाद और विरोध क्यों?

 इसके प्रावधानों को लेकर देश में विरोध के स्वर खुलकर सामने आ रहे हैं।
विरोध मुख्य रूप से सामान्य वर्ग (General Category) या सवर्ण वर्ग के छात्रों, और इस वर्ग से जुड़े संगठनों की ओर से आ रहे हैं। सोशल मीडिया में जबरदस्त तरीके से विरोध व्यक्त किया जा रहा है।सवर्ण वर्ग से जुड़े लोगों का मानना है कि इसके माध्यम से सवर्ण वर्ग के छात्रों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।
ड्राफ्ट में false/malicious शिकायत पर जुर्माना/सजा का प्रावधान था, लेकिन फाइनल में इसे हटा दिया गया। इससे बदले की भावना से झूठी शिकायतें बढ़ने का आरोप लगाया जा रहा है। (SC/ST Act जैसा डर)।
उनकी मानें तो नियम मुख्य रूप से SC/ST/OBC/EWS/PwD के खिलाफ भेदभाव पर फोकस करते हैं।वहीं सामान्य वर्ग को स्पष्ट संरक्षण नहीं, जिससे “reverse discrimination” या “General को ऑटो oppressor” मानने का डर है। Equity Squads/Ambassadors को “surveillance” या “निगरानी” कहा जा रहा है ।लेकिन इससे कैंपस में डर का माहौल बनेगा और कहीं न कहीं merit प्रभावित होगी।
यही नहीं इससे caste divisions बढ़ने की भी संभावनाएं बढ़ेंगी।
सोशल मीडिया पर #UGCRollback, #UGC_RollBack जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ इसे “campus का नया SC/ST Act”, “identity surveillance” या “tushTikaran” कह रहे हैं।

दूसरी तरफ, समर्थक (SC/ST/OBC संगठन और एक्टिविस्ट) कहते हैं कि कैंपस में जातिगत भेदभाव की घटनाएं पहले से ज्यादा हैं। OBC को शामिल करना सही कदम है और यह नियम इक्विटी लाने में मदद करेगा।

नियम में क्या-क्या अनिवार्य है?

हर संस्थान में समानता समिति (Equity Committee) बनानी होगी। इसकी अध्यक्षता कुलपति या प्रिंसिपल करेंगे। इसमें SC/ST/OBC/दिव्यांग/महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा।

समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) स्थापित करना होगा। यह केंद्र शिकायतों की जांच करेगा, जागरूकता फैलाएगा और मदद करेगा।
इक्विटी स्क्वॉड (निगरानी टीम) और इक्विटी एम्बेसडर बनाए जाएंगे।
24 घंटे हेल्पलाइन चलानी होगी।
छात्रों-कर्मचारियों की जानकारी वाली डेमोग्राफिक ऑडिट करनी होगी।
शिकायत ऑनलाइन या ऑफलाइन दर्ज की जा सकती है। गोपनीयता (नाम छिपाने) का विकल्प भी है।
संस्थान के प्रमुख (VC/प्रिंसिपल) खुद इसकी जिम्मेदारी लेंगे।

नियम न मानने पर सजा

UGC सख्त कार्रवाई कर सकती है, जैसे:UGC की योजनाओं से बाहर करना
डिग्री/कोर्स चलाने पर रोक
ऑनलाइन/दूरस्थ शिक्षा (ODL) बंद करना
UGC की लिस्ट से नाम हटाना

यह नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर आधारित है, खासकर रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद।

UGC ने अभी तक विरोध पर कोई बड़ा स्पष्टीकरण नहीं दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विवाद बढ़ता रहा तो UGC या शिक्षा मंत्रालय में संशोधन या स्पष्टीकरण जारी कर सकता है। फिलहाल, यह नियम लागू है और कैंपस में इसके असर पर सबकी नजरें टिकी हैं।