क्रांतिकारी नेता रघुनाथ महतो की 287 वीं जयंती, जो आज उनके पैतृक गांव नीमडीह में मनाई गई,

क्रांतिकारी नेता रघुनाथ महतो की 287 वीं जयंती, जो आज उनके पैतृक गांव नीमडीह में मनाई गई,

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क्रांतिकारी नेता रघुनाथ महतो की 287 वीं जयंती, जो आज उनके पैतृक गांव नीमडीह में मनाई गई,

 

क्रांतिकारी नेता रघुनाथ महतो की 287 वीं जयंती, जो आज  उनके पैतृक गांव नीमडीह  में मनाई गई,  इस अवसर पर झारखंड के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व रघुनाथ महतो को याद किया गया। यह आयोजन न केवल उनके पैतृक गांव नीमडीह प्रखंड के घुटियाडीह में, बल्कि पूरे झारखंड राज्य, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

रघुनाथ महतो कौन थे?
रघुनाथ महतो 18वीं सदी के एक क्रांतिकारी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन और स्थानीय जमींदारों के खिलाफ चुआड़ विद्रोह (Chuar Rebellion) का नेतृत्व किया। यह विद्रोह 1769 से 1778 तक चला और झारखंड के आदिवासी समुदायों के बीच स्वशासन और स्वतंत्रता की भावना को जागृत करने वाला एक ऐतिहासिक आंदोलन था। उनका नारा “अपना गांव, अपना राज; दूर भगाओ विदेशी राज” उस समय की जनता के लिए आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का प्रतीक बना। रघुनाथ महतो का जन्म नीमडीह क्षेत्र के घुटियाडीह गांव में हुआ था, और उनकी शहादत लोटा किता (सिल्ली) में हुई, जो आज भी उनके बलिदान की गवाही देता है।

इस मौके पर पश्चिम बंगाल और ओडिशा से आए सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया,
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। देवेंद्रनाथ महतो ने अपने संबोधन में रघुनाथ महतो के जीवन, उनके संघर्ष और विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “रघुनाथ महतो के विचारधारा से ही झारखंड का कल्याण संभव है,” जिससे उनकी प्रासंगिकता और झारखंड के विकास में उनके दर्शन की महत्ता पर जोर दिया गया।
इस मौके पर उन्होंने उन्होंने रघुनाथ महतो के वंशजों से मुलाकात की

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