मोदी सरकार के ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य करने के फैसले पर बवाल, कांग्रेस ने बताया निजता का उल्लंघन

मोदी सरकार के ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य करने के फैसले पर बवाल, कांग्रेस ने बताया निजता का उल्लंघन

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नई दिल्ली : भारतीय दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी मोबाइल हैंडसेट निर्माताओं को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि 1 जनवरी 2026 से भारत में बिकने वाले हर नए स्मार्टफोन में ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) पोर्टल का आधिकारिक ऐप पहले से इंस्टॉल (प्री-इंस्टॉल्ड) होना अनिवार्य होगा। विभाग का दावा है कि यह कदम साइबर ठगी, फिशिंग, फ्रॉड कॉल्स और डुप्लीकेट/फर्जी IMEI नंबर वाले फोन की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए उठाया गया है।

‘संचार साथी’ ऐप के जरिए उपभोक्ता अपने फोन की IMEI वैधता जांच सकते हैं, खोए या चोरी हुए फोन को ब्लॉक कर सकते हैं और CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल से जुड़ी दूसरी सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। DoT का कहना है कि प्री-इंस्टॉल्ड ऐप होने से आम नागरिक को इन सुविधाओं तक तुरंत पहुंच मिलेगी और फ्रॉड के मामले तेजी से कम होंगे।

हालांकि इस फैसले ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस के महासचिव और राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे “निजता के मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन” करार दिया है। वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा “मोदी सरकार एक और खतरनाक कदम उठा रही है। हर नए मोबाइल फोन में ‘संचार साथी’ नाम का सरकारी ऐप प्री-इंस्टॉल्ड और अन-रिमूवेबल करना चाहती है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त निजता के अधिकार और जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का सीधा हनन है। यह हर भारतीय नागरिक पर नजर रखने का सरकारी जरिया बनेगा।”

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि सरकार बिना किसी पार्लियामेंटरी मंजूरी या व्यापक जन-चर्चा के नागरिकों के फोन में जबरन अपना ऐप थोप रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल है। विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले को “डिजिटल तानाशाही” और “सर्विलांस स्टेट” की दिशा में कदम बताया है।

फिलहाल दूरसंचार विभाग ने निर्माताओं को 31 दिसंबर 2025 तक सभी जरूरी तकनीकी बदलाव करने को कहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

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