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चाईबासा : सोनुआ प्रखंड का मेईलपीड़ गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित, ग्रामीणों की जिंदगी जोखिम में ..देखे वीडियो

चाईबासा : सोनुआ प्रखंड का मेईलपीड़ गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित, ग्रामीणों की जिंदगी जोखिम में

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चाईबासा, 15 दिसंबर : झारखंड सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुआ प्रखंड में स्थित मेईलपीड़ गांव की हकीकत इससे कोसों दूर है। यह छोटा सा आदिवासी बहुल गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित है, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।गांव तक पहुंचने का कोई सरकारी रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों ने मजबूरी में जंगल और झाड़ियों को काटकर एक संकरा कच्चा रास्ता बनाया है। इस खतरनाक पगडंडी पर चलना ही अपने आप में जोखिम भरा है। बच्चे स्कूल जाने के लिए गोद या कंधे पर बैठाकर ले जाए जाते हैं। बरसात के मौसम में यह रास्ता कीचड़ और गड्ढों से भर जाता है, जिससे फिसलन और दुर्घटना का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बीमार पड़ने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई बार मरीजों को खटिया या बहंगी पर ढोकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से पक्की सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।पश्चिम सिंहभूम जिले के अन्य गांवों में भी सड़क की समस्या आम है। हाल के दिनों में सोनुआ प्रखंड के कुछ गांवों में श्रमदान से सड़क बनाई गई, जबकि अन्य इलाकों में वन विभाग की अनुमति के अभाव में निर्माण रुका हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगली और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण विकास कार्यों में देरी होती है, लेकिन ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह स्थिति न केवल मेईलपीड़ बल्कि जिले के कई दूरस्थ गांवों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। सरकार की योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के बावजूद कई गांव कनेक्टिविटी से वंचित हैं। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उनकी मांग सुनी जाएगी और गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी।

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