वर्ल्ड वॉर 2 (World war 2) के समय के 227 किलो बम को सेना ने किया डिफ्यूज ।
वर्ल्ड वॉर 2 (World war 2) के समय के 227 किलो बम को सेना ने किया डिफ्यूज ।

पूरे एक किलोमीटर के इलाके को खाली कराया गया । बम को नदी में गाड़ा गया। घेराबंदी की गई । काफी सतर्कता के साथ बम को डिफियूज किया गया।
पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा में स्वर्णरेखा नदी में मिले दोनों बम को डिफियूज कर दिया गया है । सेना ने 227 किलो के WWII-काल के जिंदा बम सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिए गए। किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ। सेना की टीम ने बेहद सावधानी और पेशेवर तरीके से ऑपरेशन पूरा किया। बाद की कार्रवाई इलाके की दोबारा जांच की गई कि और कोई बम तो नहीं बचा।

क्या है मामला
पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपाड़ा-नागुडसाई गांव में स्वर्णरेखा (सुबर्णरेखा) नदी के किनारे रेत खुदाई करते समय बालू मजदूरों को एक बड़ा, गैस सिलेंडर जैसा भारी बम मिला। वजन लगभग 227 किलो (500 पाउंड)।
बम पर साफ निशान थे — AN-M64 500 lb American Made। यह द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के समय का अमेरिकी एरियल बम था, जो अभी भी लाइव (जिंदा) और सक्रिय था।
स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। पुलिस को सूचना दी गई। रांची से बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीम ने 19-20 मार्च को जांच की और पुष्टि की कि बम एक्टिव है और बहुत खतरनाक। पुलिस ने तुरंत 1 किलोमीटर के दायरे में इलाका सील कर दिया। आसपास के गांवों में लोगों को बाहर निकलने और आने-जाने पर सख्ती से रोक लगा दी गई। ट्रैफिक डायवर्ट किया गया।
दूसरा बम भी मिला
21 मार्च को भारतीय सेना की ड्रोन सर्वे टीम ने इलाके की हवाई मैपिंग की। इसमें दूसरा समान बम भी मिलने के संकेत मिले। एक बम तो नदी किनारे था, दूसरा एक गांव वाले के घर के पास डेंजर जोन में। स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि बालू के नीचे कुल 8-10 और ऐसे बम दबे हो सकते हैं। यह क्षेत्र WWII के समय अमेरिकी एयरफील्ड के करीब था, इसलिए बम यहां गिरे या डंप हुए होंगे।
सेना की एंट्री और तैयारी
जमशेदपुर के SSP और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत भारतीय सेना से मदद मांगी। सेना की बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड (EOD टीम) — 8 अधिकारियों सहित तकनीकी टीम — रांची/दिल्ली से बहरागोड़ा पहुंची। टीम में विशेष रोबोट, X-रे उपकरण, वॉटर डिसरप्टर, कंट्रोल्ड डेटोनेशन चार्ज और EOD सूट थे।
NDRF, अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया। बमों को सुरक्षित जगह पर नदी किनारे या गड्ढे में अस्थायी रूप से रखा गया ताकि कोई छेड़छाड़ न हो। आसपास के गांवों (खासकर पश्चिम बंगाल सीमा वाले इलाकों) में सख्त सुरक्षा बढ़ा दी गई।
डिफ्यूज प्रक्रिया (कैसे किया गया?
सेना की टीम ने स्टैंडर्ड EOD प्रोटोकॉल फॉलो किया: पूर्ण घेराबंदी और निकासी — इलाके को पूरी तरह खाली कराया गया। कोई भी नागरिक 1 किमी के अंदर नहीं रहने दिया गया।
रिमोट जांच — रोबोट और कैमरा से बम की फ्यूज (डेटोनेटर) की स्थिति, स्थिरता और विस्फोटक की मात्रा चेक की गई। AN-M64 बम में सैकड़ों किलो TNT-समकक्ष विस्फोटक होता है।
डिफ्यूजेशन — पहले बम का फ्यूज रिमोट तरीके से निष्क्रिय या हटाया गया ।
बम को गहरे गड्ढे में रखकर छोटे प्राइमरी चार्ज से नियंत्रित विस्फोट किया, ताकि पूरा बम एक साथ न फटे।
इसी तरह दूसरे बम को भी हैंडल किया गया।
सुरक्षा उपाय — पूरी प्रक्रिया रिमोट से की गई। टीम ने EOD सूट पहने। आसपास अग्निशमन गाड़ियां और एम्बुलेंस स्टैंडबाय रखी गईं।
सेना और प्रशासन को सलाम
भारतीय सेना के जवान, NDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने बड़े हादसे को टाल दिया। यह उनकी professionalism और साहस की मिसाल है।

















