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जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले में हेमंत सरकार पर बाबूलाल मरांडी का तीखा प्रहार, किंगपिन को बचा रही सरकार, आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार करा रही

रांची : झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले में सीआईडी की कार्रवाई पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार पेपर लीक के किंगपिन को बचाने के लिए सबूतों को मिटा रही है, जबकि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखरता से आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार कर उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।

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बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि उन्हें हाल ही में सूचना मिली है कि जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक प्रकरण में संतोष कुमार मस्ताना (प्रशाखा पदाधिकारी, सचिवालय सेवा) को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। मस्ताना ने इस मामले में सबसे मुखरता से आवाज उठाई थी और पेपर लीक के ठोस सबूत भी उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा, इस केस में सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ रहे शिक्षकों को सीआईडी द्वारा बार-बार नोटिस थमाए जा रहे हैं।

सबूत मिटाने और गवाहों को धमकाने का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सीआईडी इस पेपर लीक केस में सारे तथ्यों और सबूतों को मिटाने का काम कर रही है। गवाहों को डरा-धमकाकर उनके बयानों को बदलवाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “आखिर ऐसी कौन सी बात है जो सीआईडी सारे तथ्यों को सरकार के इशारे पर तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है? गवाहों के बयान बदलवाने के पीछे क्या राज है?”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कल (29 अक्टूबर) इस केस की हाईकोर्ट में सुनवाई है, लेकिन आज ही संतोष कुमार मस्ताना की गिरफ्तारी करना समझ से परे है। उन्होंने मामले के तथ्यों का जिक्र करते हुए बताया कि शुरुआत में आयोग ने दावा किया था कि सारे सबूतों से छेड़छाड़ की गई है, लेकिन एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट से साफ हो गया कि किसी भी मोबाइल में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। छात्रों ने नेपाल में पेपर लीक का कनेक्शन बताया था, जिसे बाद में सीआईडी ने खुद स्वीकार किया। सीआईडी ने माना कि नेपाल 28 लोग गए थे और उनमें से कई छात्र परीक्षा पास भी कर चुके हैं।

मोबाइल सबूतों को ‘गेस क्वेश्चन’ बताने की कोशिश

बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा कि सबूत के तौर पर दिए गए मोबाइल फोन में मिले अधिकांश प्रश्नों के उत्तरों का मिलान सही पाया गया था। लेकिन अब सीआईडी कोर्ट में इन्हें महज ‘गेस क्वेश्चन’ साबित करने पर तुली हुई है। “हर तथ्य को शुरू से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। यह स्पष्ट है कि पेपर लीक प्रकरण में किंगपिन को बचाने के लिए सरकार भ्रष्टाचार विरोधियों को गिरफ्तार कर उनकी आवाज को कुचलना चाहती है,” उन्होंने जोर देकर कहा।

पृष्ठभूमि: लंबे समय से चल रही जांच

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा 21-22 सितंबर 2024 को आयोजित हुई थी, जिसमें पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे। सीआईडी ने जांच शुरू की, जिसमें नेपाल कनेक्शन, पुलिसकर्मियों की संलिप्तता और मास्टरमाइंड शशिभूषण दीक्षित (गोरखपुर से गिरफ्तार) जैसे खुलासे हुए। अब तक 11 लोगों पर चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, लेकिन छात्र संगठनों और विपक्ष की मांग है कि सीबीआई जांच हो। झारखंड हाईकोर्ट ने परिणाम घोषणा पर स्टे लगा रखा है और अगली सुनवाई बाकी है।

भाजपा नेता ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और कहा कि यह भ्रष्टाचार की जड़ों को काटने का समय है, न कि आवाज दबाने का। इस मामले पर छात्र संगठनों ने भी विरोध जताया है, जो सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।

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