गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मुलाकात के मायने .(Hemant Soren meet amit shah)
Hemant Soren meet amit shah
भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) और झारखंड उच्च न्यायालय की सुनवाई से पहले, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Hemant Soren meet amit shah )की मुलाकात हुई . हलाकि मिलने के बाद सुचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने इसे महज एक औपचारिक मुलाकात बताया है . लेकिन राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले यह मुलाकात काफी अहम् माना जा रहा है । खबर है की कई अहम् मुद्दों को लेकर देश के गृह मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात हुई है ।

रहस्य घाटी का : तैमारा घाटी रांची जमशेदपुर सड़क पर समय और साल बदल (Time and year change) जाता है।
Time and year change रांची का रांची जमशेदपुर जिसे टाटा रोड भी कहते हैं रांची के प्रख्यात पर्यावरणविद और भूगर्भशास्त्री नीतिश प्रियदर्शी…

नेहा तिर्की ने गंगोत्री कुजूर को दी मात । BJP की झारखंड में लगातार चौथी बार उपचुनाव में हार
झारखंड में एक सीट के लिए हुए उपचुनाव में जनता ने एक बार फिर BJP को नकारते हुए झारखंड में हेमंत सरकार…
सबसे अहम् यह है की मुख्यमंत्री दिल्ली के लिए रवाना हुए और केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने के लिए तुरंत तैयार हुए। जाहिर है की झारखण्ड में बीजेपी जम्म की प्रमुख विरोधी पार्टी है और हाल में बीजेपी और जेएमएम के रिश्ते झारखण्ड में अच्छे नहीं रहे है और मुख्यमंत्री ने भी देश के प्रधान मंत्री के कार्यो पर काफी कड़ी टिप्पणी भी की है . ऐसे में गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की मुलाकात को राजनतिक पंडित कई चश्मे में देख रहे है .JISME प्रमुख मुद्दा है झारखंड के पूर्व राज्यपाल और एनडीए के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन को लेकर चर्चा ।
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झामुमो के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि वे द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी कुछ चिंताएँ और शिकायतें हैं जिन्हें केंद्र सरकार को पहले बताना था ।
लेकिन राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि ये मांगें महज एक छलावा है क्योंकि हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी की शिकायतें कहीं और हैं.भारत निर्वाचन आयोग हेमंत सोरेन और उनके विधायक भाई बसंत सोरेन के खिलाफ लाभ के पद के मामले की सुनवाई करने वाली है। सुनवाई 28 जून और 29 जून को निर्धारित की गई है। दोनों ने पहले ही चुनाव आयोग से पर्याप्त समय ले लिया है और सुनवाई के आगे किसी भी विस्तार की संभावना नहीं है।

















