ED:-ईडी ने रिमांड में लेने के बाद शुरू की छवि रंजन से पूछताछ , आज बुलाये जायेंगे विष्णु अग्रवाल

ED:-ईडी ने रिमांड में लेने के बाद शुरू की छवि रंजन से पूछताछ , आज बुलाये जायेंगे विष्णु अग्रवाल

Author drishtinow | Edited by drishtinow
Updated: Mon, 08 May 2023 09:59 AM (IST)

ED

प्रेरणा चौरसिया

Drishti  Now  Ranchi

रांची की पूर्व डीसी छवि रंजन को भूमि घोटाले से जुड़े एक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में रविवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिरासत में ले लिया. ईडी की टीम सुबह साढ़े 11 बजे बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल से दफ्तर पहुंची। ईडी 12 मई तक छवि रंजन से पूछताछ करेगी।

साथ ही ईडी ने विष्णु अग्रवाल को आज पूछताछ के लिए बुलाया है. ईडी को अपनी जांच के दौरान पता चला है कि छवि रंजन कई भूमि दस्तावेजों के फर्जीवाड़े के पीछे का मास्टरमाइंड है, जिसमें बरियातू रोड पर 455 एकड़ जमीन की खरीद और बिक्री शामिल है, जिस पर सेना का कब्जा था।

ऐसे में रविवार को ईडी ने छवि रंजन से इस सिंडिकेट के उन अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मांगी जिन्हें जमीन के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया. छवि रंजन की रिमांड याचिका में, ईडी ने पहले अदालत को सूचित किया था कि एक सुव्यवस्थित गिरोह नकली जमीन के लिए काम कर रहा था, जिसमें उच्च पदस्थ नौकरशाहों और राजनेताओं के साथ-साथ भू-राजस्व कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। चेक, वास्तव में। इसलिए इस सिंडिकेट की पूरी जांच जरूरी है।

आज विष्णु अग्रवाल सहित चार आरोपियों से होगा छवि का सामना

ईडी ने सोमवार को विष्णु अग्रवाल को पूछताछ के लिए बुलाया है। ईडी सूत्रों का कहना है कि विष्णु अग्रवाल ने छवि रंजन के गोवा टूर का खर्च उठाया था। अब ईडी उनसे यह सवाल करेगा कि आखिर क्या जरूरत पड़ गई कि उन्हें छवि रंजन के गोवा टूर के सारे खर्च वहन करने पड़े।

ऐसे में विष्णु अग्रवाल की परेशानी बढ़ सकती है। 8 मई को लखन सिंह, राजेश राय और भरत प्रसाद से भी पूछताछ होगी। बता दें कि ईडी ने 13 अप्रैल को जमीन घोटाले मामले में छवि रंजन सहित 18 लोगों के 22 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें लखन सिंह, राजेश राय और भरत प्रसाद भी शामिल थे। अब सभी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ होगी।

सीआईडी ने कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट, बताया- राजीव ने दबंगई से जमीन पर कब्जा किया

सीआईडी ने एसटी/एससी थाने में दर्ज कांड संख्या 56/22 में कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें बताया है कि दीपक कच्छप के परदादा कोल्हा मुंडा द्वारा वर्ष 1959 में जमीन खरीदी गई थी। तब से यह जमीन उनके ही पास थी। लेकिन, अधिवक्ता राजीव कुमार ने छलपूर्वक दबंगई दिखाते हुए उस जमीन से दीपक कच्छप के गरीब आदिवासी परिवार को बेदखल कर दिया। जबरन जमीन पर बाउंड्री कर कब्जा कर लिया। यही नहीं जांच में यह भी पता चला है कि राजीव ने वादी को जातिसूचक शब्दों से भी अपमानित किया।

 

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