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Ranchi: बिना योग्यता कोई भी डाक्टर स्पेशलिस्ट बन इलाज किया तो होगी क़ानूनी कार्यवाही , रजिस्ट्रेशन भी हो सकता है रद्द

 

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Ranchi: आप को कोई शारीरिक परेशानी हो और आप डाक्टर से दिखाने जा रहे है और इस दौरान सड़क पर बने साइनबोर्ड पर लिखी बड़ी-बड़ी डिग्रियों के आधार पर यदि आप डॉक्टरों के ज्ञान का मूल्यांकन करते हैं और उनसे रोगमुक्ति की उम्मीद करते हैं तो सावधान हो जाइए। ये डॉक्टर आपकी जान खतरे में भी डाल सकते हैं। क्योंकि रांची ही नहीं, पूरे झारखंड में कई ऐसे डॉक्टर हैं जो अपने आवास या क्लीनिक के बाहर साइनबोर्ड लगाकर डायबिटोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, डर्मेटोलॉजिस्ट, थायरॉयड विशेषज्ञ, पेट रोग विशेषज्ञ आदि विशेषज्ञता लिख मरीजों को धोखा दे रहे हैं।

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ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। स्टेट काउंसिल ऐसे डॉक्टरों की जांच करेगा। इसके बाद उनपर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। एनएमसी ने कहा है कि कोई भी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर तब तक विशेषज्ञ (क्लीनिकल स्पेशलिस्ट) होने का दावा नहीं करेगा, जब तक कि उसके पास मॉडर्न मेडिसीन की उस विशिष्ट शाखा में एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण और योग्यता न हो।

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नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने सभी राज्यों के स्टेट मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार को निर्देश जारी किया है। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर ऐसी कोई डिग्री/योग्यता प्रदर्शित नहीं कर सकता जो मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) और नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) द्वारा मान्यता प्राप्त न हो। ऐसे ही बिना योग्ता के स्पेशलिस्ट बने डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। इतना ही नहीं गलत पाए जाने पर डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल कर दिया जाएगा।

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एनएमसी की एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (ईएमआरबी) के अपर सचिव मनीष कुमार मित्तल ने झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल को भेजे पत्र में कहा है कि बोर्ड के संज्ञान में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर किसी विशेष शाखा में अपेक्षित योग्यता हासिल किए बिना ही खुद की विशेषज्ञता का दावा करते हैं। वहीं इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों द्वारा भी गैर-मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और डिप्लोमा वाले स्वघोषित विशेषज्ञ या सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टरों का मुद्दा उठाया गया है।

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