सिमडेगा में खाट पर सिस्टम: गर्भवती को खटिया पर ढोकर ले जाना पड़ा अस्पताल

सिमडेगा में खाट पर सिस्टम: गर्भवती को खटिया पर ढोकर ले जाना पड़ा अस्पताल

शंभू कुमार सिंह

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विकास की ऊंचाइयों को छूते हुए भारत ने चांद, मंगल और अंतरिक्ष तक अपनी पहुंच बनाई है, लेकिन झारखंड के सिमडेगा जिले में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव विकास की राह में रोड़ा बना हुआ है। नक्सल प्रभावित इस जिले को केंद्र सरकार ने विशेष जिले के रूप में चिह्नित कर विकास के लिए कई पैकेज दिए, फिर भी आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण इलाकों में सड़क की कमी के कारण वाहन नहीं पहुंच पाते। नतीजतन, ग्रामीणों को आज भी खटिया पर मरीजों को ढोकर अस्पताल ले जाना पड़ रहा है, जिससे सिमडेगा में “खाट पर सिस्टम” की तस्वीर बार-बार सामने आती है।

ताजा मामला बानो प्रखंड के डुमरिया मारिकेल गांव का है, जहां दो दिन से प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती सुसान्ती बागे को सड़क के अभाव में करीब 3 किलोमीटर तक खटिया पर लाया गया। इसके बाद कच्ची सड़क से रौतिया सामाज प्रखंड अध्यक्ष और स्थानीय मुखिया के सहयोग से निजी कार द्वारा बानो अस्पताल पहुंचाया गया।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सिमडेगा की उपायुक्त (डीसी) कंचन सिंह ने संज्ञान लिया है। डीसी ने कहा कि वे स्वयं इस मामले की निगरानी कर रही हैं और संबंधित अधिकारियों को महिला की उचित देखभाल के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़कों के अभाव में उन्हें ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जो विकास के दावों पर सवाल उठाता है।

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