झारखंड हाइकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अंचलाधिकारी के पास आदेश वापस लेने का अधिकार नहीं
झारखंड हाइकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अंचलाधिकारी के पास आदेश वापस लेने का अधिकार नहीं
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि एक बार आदेश पारित हो जाने के बाद अंचलाधिकारी को उसे वापस लेने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने रांची शहर अंचल द्वारा निर्गत पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र से संबंधित एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्णय दिया।
याचिकाकर्ता अभिजीत बोस ने पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र के निरस्तीकरण को चुनौती दी थी। अदालत ने प्रार्थी और सरकार के पक्ष को सुनने के बाद याचिका का निपटारा करते हुए अंचलाधिकारी के निरस्तीकरण आदेश को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि आदेश पारित होने के बाद उसका पुनर्विचार अंचलाधिकारी नहीं कर सकता। इसके लिए अपीलीय या पुनरीक्षण फोरम ही एकमात्र रास्ता है।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार तिवारी ने पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि अंचलाधिकारी ने 24 जनवरी 2025 को इस मामले में आदेश पारित किया था। यह फैसला प्रशासनिक आदेशों की वैधता और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

















