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देवघर में सरकारी दफ्तर बना मिनी बार: जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों का शराब पार्टी का वीडियो वायरल, उपायुक्त ने दिए जांच के आदेश

पंकज पांडे

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झारखंड के देवघर जिले में जल संसाधन विभाग के कार्यालय में अनुशासनहीनता का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभाग के प्रधान लिपिक राजेंद्र प्रसाद मंडल और अनुसेवक करन सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों कार्यालय समय के दौरान सरकारी दफ्तर में शराब और सिगरेट की महफिल सजाए नजर आ रहे हैं। वीडियो में कर्मचारी कार्यालय की टेबल-कुर्सियों और दस्तावेजों के बीच “थोड़ी-थोड़ी पिया करो” गाने की धुन पर झूमते हुए दिख रहे हैं, जबकि शराब की बोतलें और सिगरेट के कश साफ देखे जा सकते हैं।

यह शर्मनाक घटना सरकारी कार्यालय की मर्यादा और प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल उठाती है। वीडियो में कर्मचारियों की बेफिक्र हरकतें और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इस घटना ने न केवल जल संसाधन विभाग, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की साख को हिलाकर रख दिया है।

उपायुक्त ने दिए जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए देवघर के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने एक चिट्ठी जारी कर वायरल वीडियो की जांच के आदेश दिए हैं। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जांच के बाद यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियम संगत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन, विभागीय जांच या प्राथमिकी (एफआईआर) जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहली बार नहीं है जब झारखंड में सरकारी कार्यालयों में अनुशासनहीनता का मामला उजागर हुआ है। हाल ही में पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक सरकारी कर्मचारी का ऑफिस में सिगरेट पीते हुए वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर कर्मचारी को 6 जुलाई को निलंबित कर दिया गया था।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस घटना ने न केवल जल संसाधन विभाग, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। जनता के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर सरकारी कार्यालयों में इस तरह की गैरजिम्मेदाराना गतिविधियां कैसे संभव हो रही हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में कितनी सख्ती और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करती है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

देवघर जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, और जल्द ही इस मामले में तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है। यदि कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच या आपराधिक कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। यह मामला न केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की जरूरत को भी उजागर करता है।

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