जमशेदपुर: टाटा पावर से निकलने वाली फ्लाई ऐश ने बर्बाद हुई आदिवासी किसानों की खेत , खेती नही हुई तो क्या खाएंगे , मुआवजे की मांग तेज
जमशेदपुर: टाटा पावर से निकलने वाली फ्लाई ऐश ने बर्बाद हुई आदिवासी किसानों की खेत , खेती नही हुई तो क्या खाएंगे , मुआवजे की मांग तेज
जमशेदपुर, : झारखंड के जमशेदपुर में इस बार की बरसात ने जुगसलाई और बिरसानगर के हुरलुंग पंचायत के आदिवासी किसानों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। आरोप है टाटा पावर के डस्ट डंप से निकला फ्लाई ऐश बरसात के पानी के साथ बहकर इनके खेतों में फैल गया, जिससे करीब 5 एकड़ से अधिक खेती की जमीन बंजर हो गई है। प्रभावित 10-12 किसान परिवारों का कहना है कि इस साल उनकी जमीन पर धान की खेती संभव नहीं है, जिससे उनके जीवन-यापन पर संकट मंडरा रहा है।
किसानों का प्रदर्शन, मुआवजे की मांग
इस मुद्दे को लेकर बीजेपी नेता अंकित आनंद के नेतृत्व में प्रभावित आदिवासी किसान सोमवार को जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने साफ तौर पर कहा कि फ्लाई ऐश डालने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें उनकी बर्बाद हुई जमीन के लिए उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे उपायुक्त कार्यालय परिसर में ही खेती करने को मजबूर होंगे।

हमारी आजीविका छिन गई
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि फ्लाई ऐश के कारण उनकी उपजाऊ जमीन अब कठोर परत में तब्दील हो गई है, जिससे खेती करना असंभव हो गया है। एक प्रभावित किसान ने बताया, “हमारी जमीन हमारी आजीविका का एकमात्र साधन थी। अब यह बंजर हो चुकी है, और हम सरकार से मुआवजे की मांग करते हैं ताकि हम अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।”
बीजेपी नेता ने उठाई आवाज
बीजेपी नेता अंकित आनंद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा, “मीडिया के माध्यम से यह मुद्दा सभी के सामने है, लेकिन प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। फ्लाई ऐश के कारण आदिवासी किसानों की जमीन बर्बाद हो गई है, और अब वे खेती नहीं कर सकते। सरकार को इन किसानों को तत्काल मुआवजा देना चाहिए।”
प्रशासन पर दबाव
किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे उपायुक्त कार्यालय में ही सांकेतिक खेती शुरू करेंगे। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, और स्थानीय लोग भी किसानों के समर्थन में सामने आ रहे हैं।
टाटा पावर की चुप्पी
इस मामले में टाटा पावर की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। किसानों का आरोप है कि कंपनी के डस्ट डंप की लापरवाही के कारण उनकी आजीविका पर संकट आया है।
प्रशासन और सरकार से मांग की जा रही है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


















