दिल्ली CM रेखा गुप्ता पर हमले के बाद बड़ा फेरबदल, पुलिस कमिश्नर एसबीके सिंह हटाए गए, सतीश गोलचा को नई जिम्मेदारी

दिल्ली CM रेखा गुप्ता पर हमले के बाद बड़ा फेरबदल, पुलिस कमिश्नर एसबीके सिंह हटाए गए, सतीश गोलचा को नई जिम्मेदारी

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नई दिल्ली : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बुधवार को जनसुनवाई के दौरान हुए हमले के बाद दिल्ली पुलिस में बड़ा फेरबदल किया गया है। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसबीके सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सतीश गोलचा को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है।

एसबीके सिंह 1 अगस्त 2025 को दिल्ली पुलिस कमिश्नर बने थे, मात्र 21 दिन के कार्यकाल के बाद हटा दिए गए। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पर हमले के बाद सुरक्षा में हुई चूक को इस बदलाव का मुख्य कारण माना जा रहा है।

नए पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को उनकी कठोर कार्यशैली और लंबे प्रशासनिक अनुभव के लिए जाना जाता है। वे पहले तिहाड़ जेल के महानिदेशक (डीजी) थे और दिल्ली पुलिस में डीसीपी, जॉइंट सीपी और स्पेशल सीपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी संभाली थी।

बुधवार सुबह सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान 41 वर्षीय राजेश भाई खिमजी भाई सकरिया ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला किया। आरोपी, जो गुजरात के राजकोट का रहने वाला है, ने शिकायतकर्ता बनकर कार्यालय में प्रवेश किया और अचानक सीएम पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर, हाथ और कंधे में चोटें आईं। इस घटना ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था, खासकर मुख्यमंत्री की Z+ सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

पुलिस ने आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया और उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हमला सुनियोजित था, क्योंकि आरोपी ने हमले से 24 घंटे पहले मुख्यमंत्री आवास की रेकी की थी और वहां का वीडियो बनाया था। आरोपी के मोबाइल से मिले कुछ नंबरों की भी जांच की जा रही है, जो गुजरात से जुड़े हैं।

हमले के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सुरक्षा को और सख्त कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर अब उनकी सुरक्षा में सीआरपीएफ की क्लोज प्रोटेक्शन टीम तैनात की गई है, जबकि दिल्ली पुलिस बाहरी सुरक्षा और फ्रिस्किंग की जिम्मेदारी संभालेगी। जनसुनवाई के दौरान अब कोई भी व्यक्ति सीधे मुख्यमंत्री के पास नहीं जा सकेगा, और शिकायतों की पहले जांच की जाएगी।

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