श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची द्वारा ग्राम दुबलिया में 350 पौधों का वितरण: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम

श्री सर्वेश्वरी समूह – शाखा राँची द्वारा ग्राम दुबलिया में 350 पौधों का वितरण: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम

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श्री सर्वेश्वरी समूह – शाखा राँची द्वारा ग्राम दुबलिया में 350 पौधों का वितरण: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम

नवीन कुमार

राँची, 24 अगस्त : श्री सर्वेश्वरी समूह – शाखा राँची ने अपने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए “सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान – वर्ष 2025” के पाँचवें चरण का आयोजन रविवार को ग्राम दुबलिया, प्रखण्ड कांके, जिला राँची में किया। इस विशेष कार्यक्रम में आम, अमरूद, मोहगनी, आँवला, जामुन सहित विभिन्न प्रजातियों के 350 पौधों का वितरण ग्रामीण बंधुओं के बीच किया गया। यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सामुदायिक जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा देने का भी एक प्रयास है।

कार्यक्रम का शुभारंभ: धार्मिक और सामुदायिक एकता का प्रतीक

कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय शिव मंदिर में विधिवत आरती-पूजन और दीप दान के साथ हुई, जिसमें ग्रामीणों और समूह के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल कार्यक्रम को एक पवित्र शुरुआत प्रदान करता है, बल्कि सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती देता है। इसके उपरांत, ग्रामीण बंधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह के उद्देश्यों, इतिहास और इसके द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची द्वारा ग्राम दुबलिया में 350 पौधों का वितरण: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम

गोष्ठी: पर्यावरण जागरूकता और समूह का परिचय

गोष्ठी में समूह के प्रतिनिधियों ने वृक्षों के महत्व और उनकी कमी से होने वाले पर्यावरणीय दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का कटाव, और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों को वृक्षारोपण और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। यह भी बताया गया कि कैसे वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि ग्रामीण समुदायों के लिए आर्थिक और सामाजिक लाभ भी प्रदान करते हैं। गोष्ठी के अंत में, ग्रामीणों के बीच 350 पौधों का वितरण किया गया, जिन्हें रोपण और देखभाल के लिए प्रोत्साहित किया गया।

श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची द्वारा ग्राम दुबलिया में 350 पौधों का वितरण: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम

श्री सर्वेश्वरी समूह: जनसेवा का प्रतीक

श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्वस्तरीय सामाजिक और धार्मिक संगठन है, जो अपने जनकल्याणकारी कार्यों के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुका है। यह समूह शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्थान जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य करता रहा है। “सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान – वर्ष 2025” के तहत समूह ने झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं। इस अभियान के अंतर्गत, ग्राम दुबलिया के इस शिविर से पहले, समूह ने ग्राम जुरकेला (जिला सिमडेगा), ग्राम दौलेचा (जिला राँची), ग्राम कोइन्जारा (जिला गुमला), और ग्राम तारूप (जिला राँची) में लगभग 1510 पौधों का रोपण और वितरण किया है।

कार्यक्रम में सहयोग और सहभागिता

इस आयोजन के सफल संचालन में श्री आशुतोष नाथ शाहदेव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने कार्यक्रम की योजना और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्राम दुबलिया से श्री विमल पहान और श्री अजय कच्छप ने सक्रिय रूप से भाग लिया और स्थानीय समुदाय को संगठित करने में सहयोग दिया। श्री सर्वेश्वरी समूह – शाखा राँची से श्री अरुण सिंह, श्री नवल किशोर सिंह, श्री राधा मोहन मिश्रा, श्री गंगाधर नाथ शाहदेव, श्री विक्रांत सिंह, श्री प्रताप आदित्य नाथ शाहदेव, श्री पवन कुमार, श्री सौरभ राज सहित लगभग 20 श्रद्धालु-सदस्यों ने इस नेक कार्य में अपनी सहभागिता दर्ज की।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सतत प्रयास

श्री सर्वेश्वरी समूह का यह वृक्षारोपण अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण समुदायों को पर्यावरण के प्रति जागरूक और सक्रिय बनाने का एक सशक्त माध्यम भी है। समूह का यह प्रयास झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

श्री सर्वेश्वरी समूह – शाखा राँची अपने इस अभियान को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजन न केवल पर्यावरण को लाभ पहुँचाते हैं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देते हैं।

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