बिहार में पहले फेज की वोटिंग खत्म, बिहार चुनाव के बीच JMM का बयान बना सियासी चर्चा का केंद्र, ‘चुनाव बाद समीक्षा’ से बढ़ी हलचल
नवीन कुमार
बिहार विधानसभा के चुनाव का पहला चरण सम्पन्न हो चुका है। 11 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होना है। 14 नवंबर को वोटों की गिनती के बाद किसकी सरकार बनेगी इसपर चर्चा का बाजार गर्म है।इस सबके बीच JMM की ओर से आया बयान राजनीतिक हलकों में सुर्खियों में है।
महागठबन्धन का अहम हिस्सा होने के बावजूद बिहार चुनाव में JMM को एक भी सीट नहीं दी गयी थी। पार्टी ने इसे संगठन की मजबूती के नाम पर तब तो मुद्दा नहीं बनाया। लेकिन RJD और congress के रवैय्ये से आहत JMM ने “चुनाव के बाद समीक्षा” की धमकी अवश्य दे डाली। और अब जबकि समीक्षा की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है सवाल उठने लगे हैं कि अब आगे क्या होगा। क्या सचमुच गंभीर समीक्षा होगी या फिर यह मात्र गीदड़भभकी थी ? क्योंकि यदि गंभीरता से JMM इसपर समीक्षा करती है तब राजनीति के रंग कुछ और ही देखने को मिल सकते हैं। इससे न केवल राजनीति के कई समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगे बल्कि यह समीक्षा आने वाले दिनों में न केवल झारखंड बल्कि देश की राजनीति की दशा और दिशा भी बदल सकती है।
आइए इसे विस्तार से समझते हैं
2024 में लोकसभा और झारखंड विधानसभा के चुनाव हुए थे। राज्य में बड़े भाई की भूमिका में रहे JMM ने न केवल लोकसभा में बल्कि विधानसभा चुनाव में भी अपने सहयोगियों के साथ उचित व्यवहार करते हुए RJD और Congress दोनों को साथ लेकर चलने और गठबंधन धर्म निभाने का काम किया था। और उसी का परिणाम है कि महागठबंधन के वोटों का बिखराव नहीं हुआ। राज्य में INDIA गठबंधन की सरकार बनी। जिसमें कांग्रेस और RJD को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया। लेकिन जब बिहार चुनाव की बारी आई तब जमुई, कटिहार, भागलपुर, बांका , किशनगंज, अररिया जैसे क्षेत्रों में JMM का अच्छा खासा प्रभाव रहने के बावजूद उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी गई। राजनीति के पंडित इसे बड़ी ” राजनीतिक भूल ” के रूप में देख रहे हैं।। ऐसे में अब आगे
JMM के लिए क्या है संभावनाएं
JMM के धमकी को लेकर क्या संभावनाएं हो सकती है काफी कुछ 14 नवंबर को आये चुनाव परिणाम पर निर्भर है। यदि परिणाम महागठबंधन के पक्ष में आता है तब JMM फिर से अपनी भूमिका तय करने के लिए बातचीत का रास्ता अख्तियार कर सकती है। लेकिन यदि इसके उलट कोई परिणाम आने पर JMM बिहार में संगठन विस्तार पर अपनी स्वतंत्र रणनीति बना सकती है।पार्टी भविष्य में खुद को मजबूती प्रदान कर भविष्य में सत्ता संतुलन की राजनीति में “किंगमेकर “की भूमिका निभा सकती है।
JMM की “चुनाव बाद समीक्षा” की धमकी को लेकर सबसे बड़ी संभावना राज्य में देखने को मिल सकता है। JMM यदि RJD और congress के मंत्रियों को सरकार से हटाती है। तब सरकार अल्पमत में आ जायेगी। स्वाभाविक है BJP फ्लोर टेस्ट की मांग करेगी। ऐसे में सरकार के गिरने से राज्य में राजनीतिक अस्थिरता होगी। और 2029 के पहले ही राज्य की राजनीति उथल पुथल हो सकती है। लेकिन राजनीति के पके खिलाड़ी हो चुके हेमंत सोरेन ऐसी स्थिति पैदा होने देंगे इसकी संभावना नहीं के बराबर है।
एक संभावना JMM की BJP से निकटता हो सकती है।और यदि दोनों मिलकर सरकार बनाते हैं तो न केवल सरकार बच सकती है।बल्कि राजनीति का एक नया समीकरण भी बन सकता है।क्योंकि पूर्व में दोनों ने मिलकर राज्य में सरकार भी चलाई है।यह समीकरण आने वाले समय मे राज्य और देश की राजनीति की दिशा और दशा भी बदल सकती है। इससे INDIA गठबंधन में दरार भी पड़ेगा ।जो Long Term effect के रूप में राजनीति को प्रभावित करेगी। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर देखा जाय तो JMM की चुनाव बाद समीक्षा वाली धमकी काफी कुछ चुनाव के परिणाम पर निर्भर करती है। यदि महागठबन्धन मजबूत रहा तो समीक्षा एक संदेश तक सीमित हो सकती है। ऐसा नहीं होने पर यह राज्य और देश की राजनीति का एक अहम मोड़ भी हो सकता है। स्थितियां तेज़ी से बदल रही है।अगले कुछ दिन राजनोति के लिए काफी अहम होगा।लेकिन यह सब कुछ निर्भर करता है हेमंत सोरेन के निर्णय पर। जाहिर सी बात है राजनीति के एक मंजे खिलाड़ी बन चुके हेमंत सोरेन क्या निर्णय लेते हैं लोगों की निगाहें इसपर टिकी होगी।

















