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इथियोपिया के ज्वालामुखी विस्फोट से दिल्ली समेत उत्तर भारत में छाया जहरीला स्मॉग, AQI 400 पार, कई फ्लाइट्स डायवर्ट-कैंसल

इथियोपिया के हैली गब्बिन (Hale Gabin) ज्वालामुखी में हुए शक्तिशाली विस्फोट के बाद निकली राख का विशाल बादल हवा के साथ हजारों किलोमीटर दूर भारत तक पहुंच गया है। यह राख का बादल 25,000 से 45,000 फीट (लगभग 7.6 से 13.7 किमी) की ऊंचाई पर फैल गया है, जिसका सीधा असर दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के बड़े हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

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दिल्ली में सोमवार देर रात से ही हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आनंद विहार, जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, एम्स और सफदरजंग जैसे इलाकों में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया है। सुबह से ही राजधानी पर हल्का ग्रे-ब्राउन स्मॉग छाया हुआ है और विजिबिलिटी कई जगहों पर 800-1000 मीटर तक सिमट गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्वालामुखी की राख ऊपरी वायुमंडल में मौजूद है, इसलिए सतह पर इसका असर अभी सीमित है, लेकिन ऊंचाई पर मौजूद सूक्ष्म कण सूर्य की रोशनी को कुछ हद तक रोक रहे हैं, जिससे दिन में भी हल्की धुंध बनी हुई है।

ज्वालामुखी राख के कारण भारतीय आसमान में उड़ानें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। अकासा एयर, इंडिगो, एयर इंडिया और कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने दिल्ली, जयपुर, अमृतसर, चंडीगढ़ आने-जाने वाली दर्जनों उड़ानों के रूट बदले हैं। कुछ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा है। DGCA ने सभी एयरलाइंस को अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि राख वाले क्षेत्रों और ऊंचाइयों (25,000-45,000 फीट) से पूरी तरह बचकर उड़ान भरें। वहीं लैंडिंग से पहले और बाद में इंजनों की विशेष जांच अनिवार्य की गई है, क्योंकि ज्वालामुखी की राख विमान के इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सतह पर हवा की गुणवत्ता पर अभी बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि राख ऊपरी वायुमंडल में है। लेकिन अगले 48-72 घंटों तक ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले विमानों के लिए खतरा बना रहेगा। यदि हवा का पैटर्न बदला तो कुछ राख नीचे भी आ सकती है, जिससे AQI में और इजाफा हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर के लोग अभी से मास्क पहनने और बाहर कम निकलने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग और CPCB इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

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