'Salgajhuri West Cabin Halt'—Built at a Cost of Crores—Lies Deserted

करोड़ों की लागत से बना ‘सालगाझुरी वेस्ट केबिन हॉल्ट’ वीरान, सुविधाओं के बावजूद ट्रेनें नहीं रुकती। ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी

'Salgajhuri West Cabin Halt'—Built at a Cost of Crores—Lies Deserted

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नीरज तिवारी

जमशेदपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल के टाटानगर-कोलकाता मुख्य रेल मार्ग पर स्थित ‘सालगाझुरी वेस्ट केबिन हॉल्ट’ इन दिनों उपेक्षा का शिकार है। अमृत भारत योजना के तहत लगभग 4.5 करोड़ रुपये खर्च कर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किए गए इस स्टेशन पर अब सन्नाटा पसरा रहता है। ग्रामीणों का आरोप है की  ट्रेनों का ठहराव बंद होने से स्थानीय यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

उद्घाटन के बाद से ही उपेक्षित

करीब साढ़े चार करोड़ की लागत से हुए पुनर्विकास कार्य में स्टेशन पर नया आधुनिक भवन, टिकट बुकिंग काउंटर और यात्री प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका वर्चुअल उद्घाटन किए जाने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि अब सफर आसान होगा। लेकिन, अक्टूबर 2025 में तीसरी रेल लाइन का कार्य पूरा होने के बाद रेलवे प्रशासन ने यहाँ से गुजरने वाली लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया।

लाइफलाइन’ बनी परेशानी का सबब

स्थानीय लोगों  का कहना है की  दैनिक यात्रियों के लिए कभी ‘लाइफलाइन’ रहा यह हॉल्ट अब केवल एक ढांचा बनकर रह गया है।

दूरी और खर्च की मार: ग्रामीणो का कहना हैं की ट्रेनों का ठहराव बंद होने से ग्रामीणों, मजदूरों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को अब ट्रेन पकड़ने के लिए टाटानगर स्टेशन या गोविंदपुर हॉल्ट तक जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उनका समय और धन, दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

असामाजिक तत्वों का अड्डा: ग्रामीणों का आरोप है की दिन भर स्टेशन परिसर में सन्नाटा रहता है, जिसके कारण शाम ढलते ही यह स्थान गंदगी और असामाजिक तत्वों का केंद्र बन जाता है। इससे सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।

रेलवे प्रशासन से त्वरित बहाली की मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक ओर सरकार स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं को ही हटा दिया गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लोकल ट्रेनों का ठहराव बहाल नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

 

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